अम्बिकापुर। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर शहर से एक बेहद हैरान और विचलित करने वाला मामला सामने आया है, जहां चंद रुपयों के मुनाफे के लिए मासूमों की जिंदगी को बारूद के ढेर पर धकेला जा रहा है। शहर के व्यस्ततम इलाके में खुलेआम गैस रिफिलिंग का अवैध और जानलेवा कारोबार संचालित हो रहा है, और सबसे शर्मनाक बात यह है कि इस बेहद खतरनाक काम को अंजाम देने के लिए एक नाबालिग बच्चे का इस्तेमाल किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने स्थानीय प्रशासन की मुस्तैदी और दावों की पोल खोल कर रख दी है।
जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला अम्बिकापुर के प्रतापपुर नाका के पास स्थित ‘आर्य लाइट’ नामक दुकान का बताया जा रहा है। इस दुकान में सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर, बिना किसी डर के अवैध रूप से गैस रिफिलिंग का काम किया जा रहा है। एलपीजी गैस रिफिलिंग बेहद संवेदनशील और जोखिम भरा काम है, जिसमें जरा सी चूक एक बड़े ब्लास्ट और कई मासूमों की मौत का कारण बन सकती है। ऐसे में एक नाबालिग बच्चे से यह काम करवाना न सिर्फ कानूनी रूप से बाल श्रम के तहत अपराध है, बल्कि सीधे तौर पर उसकी जान से खिलवाड़ भी है। आस-पास के रहवासियों और राहगीरों के लिए भी यह दुकान एक बड़े खतरे की घंटी बनी हुई है।इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्थानीय शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। व्यस्त मुख्य मार्ग के पास सालों से चल रहे इस अवैध कारोबार पर अब तक संबंधित विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ी, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है। स्थानीय जागरूक नागरिकों का कहना है कि शासन-प्रशासन और श्रम विभाग को इस मामले को तत्काल संज्ञान में लेना चाहिए। ‘आर्य लाइट’ दुकान के संचालक के खिलाफ बाल श्रम प्रतिषेध कानून और अवैध गैस रिफिलिंग के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि चंद पैसों के लिए किसी मासूम की बलि न चढ़ सके।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्थानीय शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। व्यस्त मुख्य मार्ग के पास सालों से चल रहे इस अवैध कारोबार पर अब तक संबंधित विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ी, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है। स्थानीय जागरूक नागरिकों का कहना है कि शासन-प्रशासन और श्रम विभाग को इस मामले को तत्काल संज्ञान में लेना चाहिए। ‘आर्य लाइट’ दुकान के संचालक के खिलाफ बाल श्रम प्रतिषेध कानून और अवैध गैस रिफिलिंग के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि चंद पैसों के लिए किसी मासूम की बलि न चढ़ सके।
