धार। मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर चल रहे विवाद में एक बड़ा मोड़ आ गया है। हाईकोर्ट द्वारा इस परिसर को सरस्वती मंदिर घोषित किए जाने के ठीक एक दिन बाद, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हिंदू समुदाय को यहाँ सालभर निर्बाध प्रवेश और पूजा करने की अनुमति दे दी है। एएसआई के इस नए आदेश ने साल 2003 की उस पुरानी व्यवस्था को बदल दिया है, जिसके तहत यहाँ सीमित दिनों में ही पूजा या नमाज की अनुमति थी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस निर्णय की पुष्टि करते हुए बताया कि एएसआई ने 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार के दिन नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी। एएसआई के मुताबिक, भोजशाला मूल रूप से संस्कृत भाषा, व्याकरण और साहित्य के अध्ययन का केंद्र होने के साथ-साथ देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित मंदिर है, इसलिए प्राचीन प्रथाओं को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।
दूसरी ओर, इस फैसले को लेकर कानूनी और सामाजिक मोर्चे पर तनातनी बढ़ गई है। कमल मौलाना वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने एएसआई के इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए इसे एकतरफा और संवैधानिक मानदंडों के खिलाफ बताया है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वे इस आदेश के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटा चुके हैं और उन्हें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत मिलेगी।
अब्दुल समद ने दलील दी कि हाईकोर्ट के आदेश में कहीं भी एएसआई या हिंदू पक्ष को दैनिक पूजा की अनुमति देने की बात स्पष्ट रूप से नहीं लिखी गई है, और एएसआई स्थापित नियमों का उल्लंघन करके नमाज की स्थापित प्रक्रिया को रोकने का प्रयास कर रहा है। दोनों पक्षों के इन दावों के बीच, प्रशासन ने क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए निगरानी बढ़ा दी है।
