कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासी फिजाओं में चुनाव नतीजों के बाद फैली हिंसा की आग अब सीधे रसूखदार गलियारों तक पहुँच गई है। बुधवार की रात मध्यमग्राम के पास भाजपा के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई, जिसके बाद पूरे राज्य का राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर है।
इस वारदात की खबर मिलते ही शुभेंदु अधिकारी भारी समर्थकों के साथ अस्पताल पहुँचे और इसे एक “सुनियोजित राजनीतिक हत्या” करार देते हुए सीधे तौर पर सत्ता पक्ष को घेरा।
जहां भाजपा नेता अर्जुन सिंह ने इस हत्याकांड के पीछे सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी का हाथ होने का संगीन आरोप लगाते हुए इसे एक डराने वाला संदेश बताया, वहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस पर हैरान करने वाला रुख अपनाया है। टीएमसी ने न केवल इस हत्या की कड़े शब्दों में निंदा की है, बल्कि पिछले तीन दिनों में अपने भी तीन कार्यकर्ताओं की हत्या का हवाला देते हुए इस पूरे मामले की ‘अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच’ कराने की चुनौती दे डाली है।
ममता बनर्जी की पार्टी का कहना है कि राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू होने के बावजूद भाजपा समर्थित उपद्रवी हिंसा फैला रहे हैं, इसलिए दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए केंद्रीय एजेंसी से जांच जरूरी है। लोकतंत्र की मर्यादा को तार-तार करती इन वारदातों ने बंगाल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
