महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में कानून की नाक के नीचे डेढ़ करोड़ रुपये की एलपीजी डकारने वाले एक बड़े रैकेट का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। जिला पुलिस की 40 सदस्यीय विशेष टीम ने महज चार दिनों की सघन जांच के बाद ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के प्लांट मैनेजर निखिल वैष्णव को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है, जबकि कंपनी के मालिक और डायरेक्टर की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब दिसंबर 2025 में सरायपाली प्रशासन द्वारा जब्त किए गए छह एलपीजी कैप्सूल टैंकरों को सुरक्षा के लिहाज से अभनपुर स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल कंपनी की कस्टडी में सौंपा गया था। कलेक्टर के निर्देश पर 30 मार्च 2026 को सुरक्षित रखरखाव के लिए सौंपी गई करीब 90 मीट्रिक टन गैस पर कंपनी के संचालकों की नीयत डोल गई।
जांच में यह चौंकाने वाली हकीकत सामने आई कि सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली कंपनी ने ही रक्षक की जगह भक्षक की भूमिका निभाई। जब टैंकर मालिक 17 अप्रैल को हाईकोर्ट से जमानत लेकर अपने वाहन लेने पहुंचा, तो सभी छह टैंकर खाली मिले। शुरुआती पूछताछ में कंपनी प्रबंधन ने ‘गैस रिसाव’ का बहाना बनाकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की पैनी नजरों से सच नहीं छिप सका। कड़ाई से की गई तफ्तीश और जब्त दस्तावेजों से पता चला कि 31 मार्च से 6 अप्रैल के बीच एक सोची-समझी साजिश के तहत टैंकरों से गैस खाली की गई थी। आरोपियों ने इस बेशकीमती एलपीजी को अपने बड़े ‘बुलेट’ स्टोरेज टैंकों में ट्रांसफर किया और फिर चोरी-छिपे इसे घरेलू व कमर्शियल सिलेंडरों में भरकर ऊंचे दामों पर बाजार में खपा दिया।
पुलिस ने कंपनी के कार्यालय से डीवीआर, कंप्यूटर और कई कच्चे हिसाब-किताब के दस्तावेज बरामद किए हैं, जो इस ‘क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट’ (अपराधिक न्यास भंग) की कहानी बयां कर रहे हैं। फिलहाल मुख्य आरोपी संतोष सिंह ठाकुर और सार्थक ठाकुर फरार हैं, लेकिन प्लांट मैनेजर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के हाथ कई अहम सुराग लगे हैं। कानून की कस्टडी में रखी गई सरकारी अमानत में खयानत का यह मामला प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसने औद्योगिक सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
