जांजगीर-चांपा। देश में खेलों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की दिशा में कार्य कर रही क्रीड़ा भारती अब पारंपरिक खेल कबड्डी को वर्ष 2036 के ओलंपिक तक पहुंचाने के बड़े लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। संस्था का मानना है कि भारत की मिट्टी से जुड़े खेलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना समय की मांग है, और इसके लिए जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को तैयार करना जरूरी है।
गोपेश्वर कहरा प्रांत उपाध्यक्ष कीड़ा भारती छत्तीसगढ़ ने कीड़ा भारती के संदर्भ में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि वर्ष 1992 में महाराष्ट्र के पुणे में स्थापित क्रीड़ा भारती आज देशभर में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने का सशक्त माध्यम बन चुकी है। संस्था खेलों के जरिए युवाओं में अनुशासन, चरित्र निर्माण, स्वास्थ्य जागरूकता और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करने का कार्य कर रही है। संगठन का उद्देश्य केवल खेल तक सीमित नहीं, बल्कि एक मजबूत और जागरूक समाज का निर्माण करना है।क्रीड़ा भारती द्वारा गांव-गांव में खेल केंद्र स्थापित कर स्थानीय प्रतिभाओं को निखारा जा रहा है। विशेष रूप से कबड्डी प्रतियोगिताओं के जरिए ग्रामीण और अंचल के खिलाड़ियों को मंच दिया जा रहा है।
ताकि वे अपनी प्रतिभा को पहचान दिला सकें। संस्था का लक्ष्य इन खिलाड़ियों को आगे बढ़ाकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना है, जिससे आने वाले समय में ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर भारत की मजबूत उपस्थिति दर्ज हो सके।संस्था वर्षभर विविध कार्यक्रमों का आयोजन करती है, जिनमें 21 जून को योग दिवस के अवसर पर सूर्य नमस्कार कार्यक्रम, 29 अगस्त को हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती पर राष्ट्रीय खेल दिवस, क्रीड़ा ज्ञान परीक्षा और सम्मान प्रमुख हैं। क्रीड़ा ज्ञान परीक्षा के माध्यम से युवाओं में खेलों के प्रतिजागरूकता बढ़ाई जाती है, वहीं जीजामाता सम्मान के जरिए खिलाड़ियों की माताओं को सम्मानित कर समाज में प्रेरणा का संदेश दिया जाता है। क्रीड़ा भारती के जिलाध्यक्ष राजीव सिंह ठाकुर नें कहा की खेल को मौलिक अधिकार के रूप में शामिल किया जाना चाहिए खेल एक मौलिक अधिकार हो खेल समूह को खेल क्लब को प्रतियोगिता में शामिल होकर कौशल को सिद्ध करने का अधिकार प्राप्त हो, किसी व्यक्ति या समूह को खेल प्रतियोगिता आयोजित करने का अधिकार प्राप्त हो खेल संघ में राजनीति प्रक्रिया हावी ना हो, क्रीड़ा भारती के द्वारा समर कैंप, करियर मार्गदर्शन, खिलाड़ियों के सम्मान समारोह और विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन भी लगातार किया जाये और खेलो को बढ़ावा दिया जाए।
इन गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को न केवल खेल के प्रति प्रेरित किया जा रहा है, बल्कि उन्हें एक बेहतर नागरिक बनने की दिशा में भी तैयार किया जा रहा है।क्रीड़ा भारती का स्पष्ट मानना है कि खेल केवल शारीरिक क्षमता बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मानसिक मजबूती, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को भी मजबूत करता है। यही कारण है कि संस्था लगातार गांव-गांव तक पहुंचकर युवाओं को खेल से जोड़ने का काम कर रही है।यदि यह अभियान इसी तरह गति पकड़ता रहा, तो आने वाले समय में कबड्डी जैसे भारतीय खेलों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिल सकती है और वर्ष 2036 ओलंपिक में भारत की दावेदारी और मजबूत हो सकती है।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से गोपेश्वर कहरा प्रदेश उपाध्यक्ष कीड़ा भारती छत्तीसगढ़ राजीव सिंह ठाकुर जिला अध्यक्ष कीड़ा भारती जांजगीर चांपा राकेश गढ़वाल उपाध्यक्ष कीड़ा भारतीय जांजगीर चांपा
मोहन यादव उपाध्यक्ष नगर पालिका परिषद जांजगीर नैला अजीत गढ़वाल जिला मंत्री क्रीड़ा भारतीय जांजगीर चाम्पा योगेश चौरसिया जिला संयोजक क्रीड़ा भारती जांजगीर चाम्पा पुष्कर दिनकर प्रदेश मलखम प्रमुख छत्तीसगढ़ देवानंद गढ़वाल उपाध्यक्ष कीड़ा भारती जांजगीर चांपा सोमदेव खरे गुड्डू कहरा उपाध्यक्ष कीड़ा भारती युवराज कहरा, चंद्रजीत सोनवान, बादल गढ़वाल, आदि उपस्थित थे।
