रायपुर। सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के अंतर्गत 2300 रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर डीएड प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का आमरण अनशन लगातार 57वें दिन भी जारी है। लंबे समय से चल रहे इस आंदोलन ने अब बेहद गंभीर और उग्र रूप ले लिया है। अनशनरत अभ्यर्थियों की शारीरिक और मानसिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, बावजूद इसके शासन स्तर पर कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
आंदोलन के 56वें दिन की रात और 57वें दिन (19 फरवरी) की शुरुआत के बीच नाराज अभ्यर्थियों ने नवा रायपुर स्थित तूता धरना स्थल पर विरोध का ऐसा दृश्य प्रस्तुत किया जिसने सभी को चौंका दिया। अभ्यर्थियों ने सामूहिक रूप से आग जलाकर जलते अंगारों पर नंगे पैर चलकर अपना आक्रोश जाहिर किया। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब सरकार उनकी आवाज नहीं सुन रही, तो वे मजबूरी में जान जोखिम में डालकर विरोध दर्ज करा रहे हैं।
इस घटना के तुरंत बाद 19 फरवरी की सुबह पुलिस प्रशासन हरकत में आया और धरना स्थल खाली कराने के लिए वाटर कैनन का प्रयोग किया गया। स्थिति तेजी से बिगड़ते देख मौके पर पुलिस के साथ फायर ब्रिगेड को भी बुलाया गया। पानी और अग्निशमन उपकरणों की मदद से आग बुझाई गई, लेकिन इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई।
झड़प के दौरान हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि चार अभ्यर्थी गंभीर रूप से घायल होकर बेहोश हो गए। उन्हें तत्काल अभनपुर अस्पताल पहुंचाया गया। इसके बाद पुलिस ने सभी अभ्यर्थियों को बसों में बैठाकर हिरासत में लिया और सेंट्रल जेल भेज दिया गया।
गौरतलब है कि डीएड और बीएड प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का यह आंदोलन 24 दिसंबर 2025 से लगातार जारी है। अभ्यर्थी तूता धरना स्थल पर डटे हुए हैं और मांग कर रहे हैं कि सहायक शिक्षक भर्ती के 2300 रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्ति की जाए। साथ ही आदिवासी अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित 1600 पदों पर भी नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए।
आंदोलन के दौरान पहले भी हालात चिंताजनक हो चुके हैं। अभ्यर्थियों ने 25 फरवरी को शिक्षा मंत्री के बंगले का घेराव किया था। वहीं आंदोलन के 48वें दिन यानी 9 फरवरी 2026 को कई अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ने लगी थी, जिन्हें स्ट्रेचर पर अस्पताल ले जाना पड़ा था।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि राज्य में 1600 से अधिक एसटी पद रिक्त हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार नियुक्ति प्रक्रिया को टाल रही है। उनका कहना है कि अदालत के आदेशों के बावजूद नियुक्ति नहीं होने से आदिवासी युवाओं और उनके परिजनों में गहरा आक्रोश फैल रहा है। कई अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल और शिक्षा मंत्री को अपने खून से पत्र लिखकर केवल एक मांग रखी है। “हमें नियुक्ति पत्र चाहिए।”
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज बीती देर रात सेंट्रल जेल पहुंचे और हिरासत में लिए गए अभ्यर्थियों से मुलाकात की। उन्होंने आंदोलनकारियों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से तत्काल संज्ञान लेने और न्यायोचित कार्रवाई करने की अपील की।
आंदोलनकारी लगातार सुप्रीम कोर्ट के 28 अगस्त 2024 के आदेश और छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के सितंबर 2025 के फैसले का हवाला दे रहे हैं। उनका कहना है कि दोनों न्यायालयों के आदेशों में प्राथमिक शिक्षक पदों पर डीएड धारकों की पात्रता स्पष्ट रूप से स्वीकार की गई है, फिर भी नियुक्ति प्रक्रिया में देरी कर अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ अन्याय किया जा रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब आंदोलन 57वें दिन तक पहुंच चुका है और हालात जानलेवा मोड़ ले चुके हैं, तब भी क्या शासन-प्रशासन समय रहते कोई ठोस फैसला ले पाएगा, या यह आंदोलन और अधिक विस्फोटक रूप लेगा।
