नई दिल्ली। देश के नेशनल हाईवे अब केवल तेज रफ्तार गाड़ियों की पहचान नहीं रहेंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की एक बड़ी मिसाल भी बनेंगे। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने पहली बार एक अनोखी और दूरदर्शी पहल करते हुए ‘बी कॉरिडोर’ विकसित करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत हाईवे किनारे ऐसे पेड़-पौधे लगाए जाएंगे जो मधुमक्खियों सहित अन्य परागण करने वाले जीवों के लिए बेहद उपयोगी होंगे। इससे न केवल हरियाली बढ़ेगी, बल्कि प्राकृतिक संतुलन भी मजबूत होगा।
अब तक हाईवे किनारे अधिकतर पौधारोपण केवल सुंदरता और सजावट के उद्देश्य से किया जाता रहा है, लेकिन NHAI की यह नई योजना उससे कहीं आगे की सोच को दर्शाती है। ‘बी कॉरिडोर’ में ऐसे पौधे लगाए जाएंगे जिनमें सालभर अलग-अलग मौसम में फूल खिलते रहें, ताकि मधुमक्खियों को लगातार रस और पराग मिलता रहे। इससे मधुमक्खियों की संख्या और स्वास्थ्य बेहतर होगा, जो खेती-किसानी और फलों-सब्जियों की पैदावार बढ़ाने में बेहद अहम भूमिका निभाती हैं।
इस योजना के अंतर्गत हाईवे किनारे नीम, करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश, जामुन और सिरिस जैसे देशी और उपयोगी वृक्षों की कतारें लगाई जाएंगी। इसके साथ ही झाड़ियां, जड़ी-बूटियां और घास भी उगाई जाएंगी, ताकि परागण करने वाले जीवों को प्राकृतिक वातावरण मिल सके। खास बात यह है कि सूखी लकड़ी या खोखले पेड़ों के तनों को हटाया नहीं जाएगा, जिससे मधुमक्खियों और अन्य कीट-पक्षियों को रहने के लिए सुरक्षित जगह मिल सके। पौधों का चयन इस प्रकार किया जाएगा कि हर मौसम में फूलों की उपलब्धता बनी रहे और हरियाली सालभर कायम रहे।
NHAI के फील्ड ऑफिस देशभर में ऐसे हाईवे सेक्शन चिन्हित करेंगे, जहां हर 500 मीटर से 1 किलोमीटर की दूरी पर फूलदार पेड़ों के हरित क्लस्टर तैयार किए जा सकें। यह दूरी मधुमक्खियों की भोजन खोजने की औसत क्षमता को ध्यान में रखकर तय की गई है। NHAI ने वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 40 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य तय किया है, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत पेड़ ‘बी कॉरिडोर’ के तहत लगाए जाएंगे। साथ ही, प्रत्येक फील्ड ऑफिस को कम से कम तीन बी कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य भी दिया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल पर्यावरण के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। इससे जैव विविधता बढ़ेगी, मधुमक्खियों जैसे परागण करने वाले जीवों को सुरक्षित आवास मिलेगा और कृषि उत्पादन में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। माना जा रहा है कि यह योजना आने वाले वर्षों में देशभर के हाईवे नेटवर्क को हरित ऊर्जा और प्राकृतिक जीवन का मजबूत केंद्र बना देगी।
