रायपुर. छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारी मनीष कश्यप (बैच 2015) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. यह कार्रवाई विभागीय सचिव से फोन पर बातचीत के दौरान अमर्यादित, आपत्तिजनक और लिंग सूचक अश्लील शब्दों के प्रयोग के आरोप में की गई है. शासन स्तर पर इस घटना को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए सख्त कदम उठाया गया है.
जानकारी के अनुसार भारत सरकार द्वारा आयोजित डेरेगुलेशन संबंधी बैठक की तैयारी को लेकर 23 जनवरी 2026 को सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने मनेन्द्रगढ़ में पदस्थ वन उप संरक्षक मनीष कश्यप से फोन पर संपर्क किया था. बातचीत के दौरान सचिव द्वारा आवश्यक जानकारी मांगी गई, लेकिन अधिकारी ने स्पष्ट जवाब देने के बजाय कथित रूप से अशोभनीय भाषा और गंदी गालियों का प्रयोग किया. यह व्यवहार शासन को अत्यंत आपत्तिजनक और अनुशासन के विरुद्ध लगा, जिसके बाद विभाग ने तत्काल निलंबन की प्रक्रिया शुरू की.
शासन द्वारा जारी आदेश में बताया गया कि अधिकारी का यह आचरण अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम 1968 के नियम-3 का उल्लंघन है. इसी आधार पर राज्य शासन ने अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम 1969 के तहत कार्रवाई करते हुए निलंबन आदेश जारी किया. निलंबन अवधि के दौरान मनीष कश्यप का मुख्यालय प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, छत्तीसगढ़ अरण्य भवन, नवा रायपुर अटल नगर निर्धारित किया गया है. इसके साथ ही उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा. यह आदेश राज्यपाल के नाम से विशेष सचिव जे.पी. पाठक द्वारा जारी किया गया है.
गौरतलब है कि यह मनीष कश्यप का दूसरा निलंबन बताया जा रहा है. इससे पहले भी तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में उन्हें निलंबित किया गया था. सरकार बदलने के बाद उन्हें मनेन्द्रगढ़ में नई पदस्थापना दी गई थी, लेकिन विवादित कार्यशैली के कारण एक बार फिर उन पर कार्रवाई की तलवार गिर गई.
