सीतापुर/अनिल उपाध्याय। चार साल पहले बिजली विभाग में हुए बहुचर्चित बिजली बिल घोटाले में चार साल बाद पांच में से दो आरोपी को गिरफ्तार करने में पुलिस को सफलता मिली है।इस मामले संलिप्त तीन आरोपी आज भी फरार है जिनकी जल्द ही गिरफ्तारी का दावा पुलिस कर रही है।इस बहुचर्चित बिजली घोटाले में लगभग तीन करोड़ रुपये का घोटाला किया गया था।जिसे विभाग के अधिकारी कर्मचारियों ने मिलकर बड़े सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया था।मामले का खुलासा होने के बाद इस घोटाले की विभागीय जांच कराई गई थी।जांच में सही पाए जाने पर विभाग द्वारा तत्कालीन सहायक अभियंता समेत पांच के विरुद्ध थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था।मुकदमा दर्ज होने के बाद चार साल तक करोड़ो के घोटाले की फाइल टेबल पर आराम फरमाता रहा।इस दौरान कितने पुलिस अधिकारी आये और गए लेकिन किसी ने इस मामले में नामजद आरोपियों को गिरफ्तार करने की जहमत नहीं उठाई।मौजूदा थाना प्रभारी अखिलेश सिंह ने पदभार संभालते ही करोड़ो के इस घोटाले की फाइल खोली और चार साल बाद इस मामले के एक आरोपी को गिरफ्तार किया।एक महीने बाद इस मामले का दूसरे आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।बाकी तीन आरोपियों की गिरफ्तारी में पुलिस जुटी हुई है।
विदित हो कि बिजली विभाग में सन 2019 से 2021 तक विद्युत वितरण केंद्र सीतापुर पेटला एवं मैनपाट में बिजली बिल में हेराफेरी करते हुए करोड़ो रुपये के घोटाले को अंजाम दिया गया था।विगत दो सालों में बिजली विभाग के अधिकारी कर्मचारियों ने मिलकर बिजली बिल के आड़ में 2 करोड़ 94 लाख 29 हजार 4 सौ 82 रुपये का घोटाला किया था।इस बात का खुलासा होने के बाद उच्चाधिकारियों ने विभागीय स्तर पर इस घोटाले की जांच कराई थी।जांच में यह पाया गया कि इस घोटाले को तात्कालिक सहायक अभियंता राजेंद्र कुमार पन्ना कार्यालय सहायक गणेश सिंह अरविंद सागर लाइनमैन सुनील केरकेट्टा एवं कंप्यूटर ऑपरेटर श्रीकांत खलखो ने मिलकर अंजाम दिया था।विभागीय जांच रिपोर्ट आने के बाद करोड़ो रूपये के घोटाले में शामिल इन पांचों के विरुद्ध 19 जनवरी 2021 को थाने में मामला दर्ज कराया गया था।अपराध दर्ज होते ही इस बहुचर्चित बिजली बिल घोटाले के सभी आरोपी विगत चार सालों से कागजो पर फरार चल रहे थे।जबकि इस घोटाले के बाद यहाँ से हटाए गए सारे आरोपित अधिकारी कर्मचारी विभाग में बकायदे अपनी सेवा दे रहे थे। इसमे से एक सहायक अभियंता कोरिया जिले में जबकि गणेश सिंह बलरामपुर एवं अरविंद जशपुर जिले में अपनी सेवाएं दे रहे थे।कमाल की बात ये है कि रिपोर्ट दर्ज कराने के चार साल बाद तक करोडो रुपये की बहुचर्चित बिजली बिल घोटाले की फाइल थाने में धूल खाती रही।इन चार सालों में किसी भी पुलिस अधिकारी ने इस घोटाले की फाइल खोलना उचित नही समझा।जितने भी पुलिस अधिकारी आये सभी ने बहती गंगा में हाथ धोया और मामले को जानबूझकर लंबित बनाये रखा।थाने में लंबित प्रकरणों के निपटारे का दबाव के बाद आखिरकार चार साल बाद इस घोटाले की फाइल खुली।थाना प्रभारी अखिलेश सिंह ने प्रभार संभालते ही पहले इस फ़ाइल को खोला और फाइल खुलते ही इस मामले में चार साल बाद पहली गिरफ्तारी हुई।महीने भर पहले पुलिस ने धारा 120B एवं 409 के तहत लाइनमैन सुनील कुमार केरकेट्टा को गिरफ्तार कर जेल भेजा।बाकी चार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस प्रयासरत थी।इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थी।इसी दौरान बिजली बिल घोटाले का एक अन्य आरोपी एवं कंप्यूटर ऑपरेटर श्रीकांत खलखो पुलिस के हत्थे चढ़ गया।जिसे गिरफ्तार करते हुए पुलिस ने न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।इस कार्यवाही में थाना प्रभारी अखिलेश सिंह एएसआई अरुण गुप्ता प्रआ नीरज पांडेय नेतराम पैंकरा आ राकेश यादव शामिल थे।
इस सम्बंध में थाना प्रभारी अखिलेश सिंह ने बताया कि करोडों रुपये के बिजली बिल घोटाले में दो आरोपी की गिरफ्तारी हुई है।बाकी अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी में पुलिस जुटी हुई है।जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जायेगा।
