– पार्षद और ठेकेदार के बीच विवाद, मोहल्ले वालों के लिए मुसीबत
जांजगीर-चांपा. जांजगीर नैला नगर पालिका अब जनसेवा का नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और लापरवाही का केंद्र बन चुकी है. अध्यक्ष और CMO की खुली मिलीभगत ने पूरा शहर को नर्क में बदल दिया है. नहरिया बाबा रोड किनारे 70 लाख रुपये की लागत से बनने वाली नाली आज अधूरी पड़ी है. वार्ड नंबर 7 के पार्षद विष्णु यादव और ठेकेदार राकेश राठौर के बीच विवाद के बाद ठेकेदार काम छोड़कर भाग गया है. ठेकेदार का आरोप है कि पार्षद काम में बाधा डालता है, पैसे की मांग करता है. लेकिन नगर पालिका के जिम्मेदारों को कोई फर्क नहीं पड़ता. न दोनों को समझाइश दी गई, न ही ठेकेदार अभी तक काम दुबारा शुरू किया हैं. 15 दिनों से ज्यादा हो गए जिसका खामियाजा मोहल्ले वाले भुगत रहे हैं. किसी के घर में किसी की तबियत खराब होती है तो रास्ता बंद होने की वजह से घर तक वाहन नहीं पहुंच रही हैं.
ठेकेदार भागा, अधिकारी सोते रहे
जिस ठेकेदार राकेश राठौर को 70 लाख का काम सौंपा गया, उसने नाली निर्माण बीच में ही छोड़ दिया. सवाल यह है कि बिना काम किए काम को अधूरा छोड़ भागने वाले ठेकेदार और पार्षद को अधिकारी द्वारा समझाइश क्यों नहीं दी गई. काम क्यों छोड़ा और किसके संरक्षण में ठेकेदार अब तक बचा हुआ है? ठेकेदार द्वारा पार्षद विष्णु यादव के खिलाफ काम में बाधा डालने व पैसे की मांग करने का आरोप लगाते हुए कोतवाली में FIR दर्ज करने का शिकायत किया है. इसमें न किसी प्रकार की कार्रवाई हुई, न ही ठेकेदार से काम दोबारा शुरू कराया गया. अब दोनों के बीच विवाद के कारण मोहल्ले वालों के लिए मुसीबत बन गया है. अधूरे नाली की वजह से रास्ता बंद हो गया हैं.
पार्षद-ठेकेदार विवाद में अध्यक्ष गायब
वार्ड 7 के पार्षद और ठेकेदार के बीच विवाद सड़क पर आ चुका है, लेकिन नगर पालिका अध्यक्ष और CMO पूरी तरह नदारद हैं. यह चुप्पी साफ इशारा करती है कि मामला सिर्फ विवाद का नहीं, बल्कि अंदरखाने चल रहे कमीशन के खेल का है. सीएमओ और अध्यक्ष के पास दर्जनों बार शिकायत पहुंची है लेकिन सुन कर भी अनसुना करते है. अध्यक्ष और सीएमओ इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं हैं. मोहल्ले वालो को सिर्फ 15 दिन हो गए काम शुरू करने के आश्वासन देते आ रहे है.
CMO सिर्फ कुर्सी गरम करने आते हैं
स्थानीय लोगों का आरोप है कि CMO रोज़ ऑफिस आते हैं, हाज़िरी लगाते हैं और चले जाते हैं. न निरीक्षण, न समीक्षा, न जनता की सुनवाई. नगर पालिका प्रशासन पूरी तरह लकवाग्रस्त हो चुका है.
अध्यक्ष 5 साल में शहर को 10 साल पीछे धकेला
अध्यक्ष की नाकामी का नतीजा यह है कि पिछले 5 वर्षों में शहर का विकास ठप हो गया. नाली, सड़क, सफाई, हर मोर्चे पर नगर पालिका फेल साबित हुई है. आज हालात ऐसे हैं कि लोग खुले नालों, बदबू और गंदगी के बीच जीने को मजबूर हैं.
बीजेपी के अंदर ही घमासान, विकास ठप
सूत्रों का दावा है कि कमीशन को लेकर अध्यक्ष और उनकी ही पार्टी के पार्षदों में टकराव चल रहा है. अंदरूनी लड़ाई का खामियाजा आम जनता भुगत रही है. विकास कार्य इसलिए रुके हैं क्योंकि हिस्सेदारी तय नहीं हो पा रही.
नगर पालिका में जंगलराज
नगर पालिका में न कोई जवाबदेही है, न कोई डर. अधिकारी मनमानी कर रहे हैं और अध्यक्ष मूकदर्शक बने हुए हैं. शिकायतों का अंबार लगा है, लेकिन सुनवाई शून्य.
अब सवाल नहीं, सीधे आरोप
– क्या 70 लाख के काम में घोटाला हुआ?
– क्या ठेकेदार को राजनीतिक संरक्षण मिला?
– FIR के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
– अध्यक्ष और CMO जनता के प्रति जवाबदेह क्यों नहीं?
– जनता अब जवाब मांग रही है
– वार्ड वासी ही नहीं, पूरे शहर के लोग अब अध्यक्ष और CMO से जवाब चाहते हैं. अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला सड़क से लेकर शासन तक गूंजेगा.
