बलरामपुर. एल.बी. संवर्ग के शिक्षक सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन जीने के बजाय आर्थिक तंगी से जूझने को मजबूर हैं. शासन-प्रशासन की जटिल प्रक्रियाओं और विसंगतिपूर्ण नीतियों ने उनकी वर्षों की सेवा को मानो शून्य कर दिया है. संविलियन के दौरान पूर्व की 20 वर्षों की सेवा अवधि को गणना में शामिल नहीं किए जाने से बड़ी संख्या में शिक्षक पेंशन के अधिकार से वंचित हो गए हैं, जिससे उनका भविष्य असुरक्षित हो गया है.
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के बलरामपुर जिलाध्यक्ष पवन सिंह सहित विकासखंड अध्यक्ष वाड्रफनगर के युद्धन जैसवाल, शंकरगढ़ के विश्वभर दास, रामचंद्रपुर के अंचल यादव, कुसमी के दीपक सिन्हा, राजपुर के विनोद यादव, बलरामपुर के श्याम गुप्ता, मंटू ठाकुर, संतोष गुप्ता, विनय गुप्ता, संजय गुप्ता, केदारनाथ दुबे, रविन्द्र गुप्ता, सत्येंद्र सोनी, विनोद कुरे, पवन पाटले, अवध गुप्ता, अमित चौरसिया, सत्येंद्र यादव, संतोष प्रजापति, मुकेश भाई पटेल, जितेंद्र सिंह तिवारी, अमित सोनी, सुफला टोप्पो, मधु पांडे, अंजना, रूपेश सोनी और चोवा राम देवांगन ने कहा कि संविलियन पूर्व की 20 वर्षों की सेवा अवधि को शून्य मानकर केवल 1 जुलाई 2018 से सेवा की गणना किए जाने के कारण शिक्षक न्यूनतम पेंशन की पात्रता भी पूरी नहीं कर पा रहे हैं. नियमों के अनुसार न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा पर पेंशन का प्रावधान है, लेकिन इस व्यवस्था के चलते 2018 से पहले नियुक्त शिक्षक भी इस दायरे से बाहर हो गए हैं.
कोयलीबेड़ा विकासखंड के व्याख्याता जैनुलाल राना इसका ज्वलंत उदाहरण हैं. अंतिम महीने में 92 हजार रुपये वेतन पाने वाले राना शून्य पेंशन पर सेवानिवृत्त हुए हैं. उन्होंने पत्र लिखकर अपना दर्द जाहिर करते हुए कहा है कि “मेरी जैसी दुर्दशा किसी की न हो।” यही स्थिति पारुल दोहरे, मलिना दास और महादेव नरेटी जैसे प्रधान अध्यापकों की भी है, जिन्हें 27 वर्षों तक सेवा देने के बावजूद बिना पेंशन सेवानिवृत्त होना पड़ा. कमोबेश यही हाल एल.बी. संवर्ग के लगभग हर सेवानिवृत्त शिक्षक का है.
छत्तीसगढ़ सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों में पूर्ण पेंशन के लिए 33 वर्ष की सेवा और न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा पर अनुपातिक पेंशन का प्रावधान है, लेकिन संविलियन तिथि से सेवा गणना के कारण 1998 और 2005 में नियुक्त शिक्षकों के लिए पेंशन अब केवल सपना बनकर रह गई है. इसका सीधा असर सेवानिवृत्त शिक्षकों और उनके परिवारों पर पड़ रहा है, जो गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं.
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, वित्त विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव को पत्र लिखकर न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा में पेंशन के नियम में शिथिलता देते हुए 5 वर्ष की सेवा पर पेंशन का प्रावधान करने की मांग की है. उन्होंने भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तराखंड सरकार के नियमों का हवाला देते हुए 20 वर्ष की अर्हकारी सेवा पर 50 प्रतिशत पेंशन निर्धारण की मांग भी उठाई है.
प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि 33 वर्ष की अर्हकारी सेवा की शर्त के कारण छत्तीसगढ़ के अधिकांश कर्मचारी 50 प्रतिशत पेंशन के लाभ से वंचित रह जाते हैं. राज्य में अब तक किसी भी कर्मचारी संगठन द्वारा 33 वर्ष की अर्हकारी सेवा को कम करने की मांग नहीं उठाई गई, जिसके चलते हजारों कर्मचारी पूर्ण पेंशन से वंचित रहे हैं. एसोसिएशन ने मांग की है कि केंद्र सरकार और अन्य राज्यों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी 33 वर्ष के स्थान पर 20 वर्ष की अर्हकारी सेवा पर 50 प्रतिशत पेंशन का प्रावधान किया जाए, ताकि प्रदेश के अधिकांश कर्मचारियों को न्याय मिल सके.
