नई दिल्ली. डिलीवरी ऐप्स पर ऑर्डर पहुंचाने वाले, घरों में काम करने वाले और रोज कमाकर जीवन चलाने वाले लाखों गिग वर्कर्स के लिए केंद्र सरकार एक बड़ी राहत की योजना पर काम कर रही है. जिन लोगों के पास न स्थायी नौकरी है, न सैलरी स्लिप और न ही मजबूत CIBIL स्कोर, उन्हें अब बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने की दिशा में अहम कदम उठाया जा रहा है. सरकार जल्द ही एक नई माइक्रोक्रेडिट स्कीम शुरू करने जा रही है, जिसके तहत पात्र लोगों को बिना किसी गारंटी के 10 हजार रुपये तक का लोन मिल सकेगा.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह योजना अप्रैल से लागू की जा सकती है. इसका खाका केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने तैयार किया है. योजना का उद्देश्य स्विगी, जोमैटो, जेप्टो, ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म्स से जुड़े डिलीवरी वर्कर्स, घरेलू सहायकों और अन्य शहरी असंगठित कामगारों को आर्थिक सहारा देना है. सरकार हर साल पात्र लाभार्थियों को माइक्रो लोन उपलब्ध कराएगी, ताकि वे अपने काम से जुड़ी जरूरी चीजें जैसे बाइक, मोबाइल फोन या अन्य उपकरण खरीद सकें और अपनी आमदनी बढ़ा सकें.
बताया जा रहा है कि यह नई स्कीम प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि यानी पीएम-स्वनिधि से प्रेरित होगी. पीएम-स्वनिधि के तहत पहले चरण में 10 हजार रुपये का लोन दिया जाता है, जिसे समय पर चुकाने पर आगे 20 हजार और फिर 50 हजार रुपये तक का लोन मिल सकता है. इसके साथ ब्याज सब्सिडी और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने जैसे लाभ भी दिए जाते हैं. गिग वर्कर्स के लिए प्रस्तावित स्कीम में भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाए जाने की संभावना है.
इस योजना का लाभ उन्हीं कामगारों को मिलेगा, जिनकी पहचान सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होगी. ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत गिग वर्कर्स, घरेलू सहायक और अन्य असंगठित कामगार इसके लिए पात्र माने जाएंगे. जिनके पास यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN), आधार जैसे वैध दस्तावेज होंगे और जिनका रिकॉर्ड सत्यापित होगा, उन्हें प्राथमिकता दी जा सकती है.
सरकार का मानना है कि बड़ी संख्या में गिग वर्कर्स ऐसे हैं, जिन्हें सिर्फ इसलिए बैंक से लोन नहीं मिल पाता क्योंकि उनके पास कोई औपचारिक आय प्रमाण या क्रेडिट हिस्ट्री नहीं होती. यह नई स्कीम इसी कमी को दूर करने की कोशिश है, ताकि ऐसे कामगार आत्मनिर्भर बन सकें और आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें.
नवंबर 2025 तक ई-श्रम पोर्टल पर 31 करोड़ से ज्यादा असंगठित कामगार और लाखों गिग वर्कर्स पंजीकृत हो चुके हैं. ऐसे में यह प्रस्तावित योजना न केवल आर्थिक मदद का साधन बनेगी, बल्कि देश के एक बड़े श्रमिक वर्ग को औपचारिक वित्तीय ढांचे से जोड़ने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित हो सकती है.
