रायपुर. छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी भले ही नवंबर से जारी हो, लेकिन बस्तर संभाग के हजारों किसानों के लिए यह व्यवस्था कागजों तक सिमटती नजर आ रही है. कर्ज लेकर खेती करने वाले किसान आज अपने ही धान को बेचने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं. टोकन न कट पाने और सत्यापन प्रक्रिया ठप होने के कारण बड़ी संख्या में किसान उपार्जन केंद्रों तक पहुंच ही नहीं पा रहे, जिससे उनकी आर्थिक परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है.
इस गंभीर समस्या को लेकर प्रभावित किसानों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा. किसानों ने टोकन कटाने की अंतिम तिथि बढ़ाने, धान खरीदी की सीमा में इजाफा करने और सत्यापन के लिए बंद किए गए ऑनलाइन पोर्टल को दोबारा शुरू करने की मांग की है. किसानों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में सिस्टम में “खाली स्थान” न दिखने के कारण टोकन नहीं कट रहा, जबकि खेत में धान तैयार पड़ा है. ऐसे में सरकार की ‘हर दाना खरीदी’ की घोषणा जमीनी हकीकत से कोसों दूर नजर आ रही है.

किसानों ने बताया कि खरीदी केंद्रों में रकबे का सत्यापन नहीं दिख रहा और एग्रिस्टेक पोर्टल पर भी नाम अपडेट नहीं हो रहा है. कई किसानों को तहसील और एसडीएम कार्यालय के कई-कई चक्कर लगाने पड़े, लेकिन समाधान अब तक नहीं निकला. खेती के लिए लिया गया कर्ज सिर पर है और धान नहीं बिकने से बैंक और साहूकार दोनों का दबाव बढ़ता जा रहा है. कुछ किसानों ने यहां तक कहा कि अगर समय रहते धान नहीं बिका, तो कर्ज चुकाना असंभव हो जाएगा.
इस पूरे मुद्दे पर कांग्रेस ने भी किसानों के समर्थन में मोर्चा खोल दिया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि धान खरीदी को लेकर सरकार की नीयत साफ नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को समय पर खाद नहीं मिली, खरीदी की लिमिट घटा दी गई और टोकन की समय सीमा तय कर हजारों किसानों को व्यवस्था से बाहर कर दिया गया. दीपक बैज ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर किसानों का धान नहीं खरीदा गया, तो यह स्थिति अन्नदाताओं को आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर सकती है.

बस्तर के किसानों की मांग साफ है, टोकन की तारीख बढ़ाई जाए, सत्यापन पोर्टल खोला जाए और खरीदी की लिमिट बढ़ाकर किसानों को राहत दी जाए. अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या अन्नदाता की पीड़ा को गंभीरता से सुना जाएगा या धान खरीदी का संकट और गहराएगा.
