अगर आप घूमने के शौकीन हैं तो आइए..बस्तर, इस झरने की खूबसूरती देख थम जाएंगे पैर!.

Written By – Parasnath Singh

यदि आपको झरनों के बारे में पूछा जाए तो यक़ीनन आप दुनियाभर में मशहूर नियाग्रा के जलप्रपात की ही चर्चा करेंगे. लेकिन भारत में ही पर्यटन के इतने अनदेखे जगह हैं जिनके बारे में भारत के लोग भी कम ही जानते हैं. ऐसा ही है एक छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में इंद्रावती नदी पर स्थित जलप्रपात.. जिसे चित्रकोट जलप्रपात के नाम से जाना जाता है. वैसे तो बस्तर में जलप्रपातों की पूरी श्रृंखला है. लेकिन चित्रकोट जलप्रपात इनमें से अनूठा और अलग है. पर्यटन विभाग की माने तो यह देश का सबसे चौड़ा जलप्रपात है.

चित्रकोट जलप्रपात जगदलपुर से 40 कि.मी. और रायपुर से 273 कि.मी. की दूरी पर स्थित है. यह छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा, सबसे चौड़ा और सबसे ज्यादा जल की मात्रा प्रवाहित करने वाला जलप्रपात है. यह बस्तर संभाग का सबसे प्रमुख जलप्रपात भी माना जाता है. जगदलपुर से समीप होने के कारण यह एक प्रमुख पिकनिक स्पाट के रूप में भी प्रसिद्धि प्राप्त कर चुका है. अपने घोडे की नाल समान मुख के कारण इस जाल प्रपात को भारत का नियाग्रा भी कहा जाता है. चित्रकूट जलप्रपात बहुत ख़ूबसूरत हैं और पर्यटकों को बहुत पसंद आता है. सधन वृक्षों एवं विंध्य पर्वतमालाओं के मध्य स्थित इस जल प्रपात से गिरने वाली विशाल जलराशि पर्यटकों का मन मोह लेती है.

‘भारतीय नियाग्रा’ के नाम से प्रसिद्ध चित्रकोट प्रपात वैसे तो प्रत्येक मौसम में दर्शनीय है, परंतु वर्षा ऋतु में इसे देखना अधिक रोमांचकारी अनुभव होता है. वर्षा में ऊंचाई से विशाल जलराशि की गर्जना रोमांच और सिहरन पैदा कर देती है. वर्षा ऋतु में इन झरनों की ख़ूबसूरती अत्यधिक बढ़ जाती है. जुलाई-अक्टूबर का समय पर्यटकों के यहाँ आने के लिए उचित है. चित्रकोट जलप्रपात के आसपास घने वन विराजमान हैं, जो कि उसकी प्राकृतिक सौंदर्यता को और बढ़ा देती है.रात में इस जगह को पूरा रोशनी के साथ प्रबुद्ध किया गया है. यहाँ के झरने से गिरते पानी के सौंदर्य को पर्यटक रोशनी के साथ देख सकते हैं. अलग-अलग अवसरों पर इस जलप्रपात से कम से कम तीन और अधिकतम सात धाराएँ गिरती हैं.

चित्रकोट जलप्रपात की यात्रा का सबसे अच्छा समय जुलाई से सितंबर के बीच होता है. इस दौरान मानसून का समय होता है और बारिश के बाद चित्रकोट वाटरफाल्स के ऊपर धुंधले आकाश में आप सुंदर इंद्रधनुष का भी नजारा देख सकते हैं. आपको बता दें कि यहां का इंद्रधनुष बहुत प्रसिद्ध है. यदि आप बिल्कुल परेशानी मुक्त यात्रा चाहते हैं तो नवंबर से जनवरी के सर्दियों के महीने भी फॉल्स की यात्रा करने का एक अच्छा समय हो सकता है. इस ठंडे और सुहावने मौसम में आप शांत सफेद झरने और हरियाली का आनंद उठा सकते हैं.

इस झरने का आकर्षक नज़ारा मानसून के मौसम में देखने को मिलता है. जब नदी अपनी पुरे जोश व् पुरे उफान के साथ गरजते हुए बहती है. और एक अनोखा अनुभव प्रदान करती है. इस झरने के पास बस्तर जनजाति की अनेक कलाकृति बास व् लकड़ी से बनाई गई सजावटी सामान, अनेक मूर्तियां, खिलौने स्थानीय निवासियों द्वारा बेहद कम कीमत पर बेचीं जाती है. यादगार स्वरुप उनलोगों से जरूर कुछ खरीदना चाहिए. जिससे उनकी आजीविका चलती रहे और उनको प्रोत्साहन भी मिलता रहे.