दिल्ली से फरमान दिखते रहो सड़क पर

रायपुर

इन दिनों कांग्रेसी गलियारों में उस फरमान को लेकर चर्चाओं का बाजार गरम है जिसमें सरकार की खिलाफत में कमजोर नहीं पड़ने इशारा किया गया है। यानी पार्टी की मजबूती को लेकर अब कांग्रेसियों को ऐसे मामलों पर अपना विरोध दर्ज कराना होगा जिससे संगठन की पकड़ दिखाई दे। लगातार चुनावों में पिछड़ रही कांगे्रस के लिए यह फरमान ऊर्जा भरने वाला माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार अब सभी प्रदेश अध्यक्षों को संगठन में नेताप्रतिपक्ष और विधायकों को सदन में अपनी उपस्थिति दिखाना होगी। इस इशारे की हलचल प्रदेश कांग्रेस में दिखाई देने लगी है और यही कारण है कि विधानसभा सत्र के दौरान विधायकों ने सदन में नागरिक आपूर्ति निगम के घोटाले को उठाया तो वहीं कार्यकर्ताओं ने नान और किसान दोनों ही मामलों को लेकर सड़क पर आंदोलन किया। सरकार को घेरने के दौरान लाठीचार्ज भी हुआ और इसके बाद प्रदेश बंद तक कराया गया।

सभी बड़े नेता रहेंगे सक्रिय :-
छत्तीसगढ़ में जहां प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और नेताप्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने इसकी कमान संभाली वहीं इसमें पार्टी के अनुशासंगि संगठन की भी भूमिका रही। दिल्ली से हुए इस इशारे का असर मध्यप्रदेश में भी देखने को मिला जहां विधायकों और प्रदेश कांग्रेस ने व्यापमं घोटाले और किसानों के नुकसान को लेकर सरकार का विरोध किया। विधायकों ने किसानों के मामले को लेकर सदन खत्म होने के बाद भी धरना दिया। इसी तरह राजस्थान में भी लगातार भााजपा सरकार का विरोध जारी है। तीनों ही प्रदेशों में कांगे्रस का बहुत नुकसान हुआ है। इसके अलावा अन्य प्रदेशों में अब पार्टी की साख मजबूत करने के लिए आंदोलन और जनता के बीच बने रहने की योजना पर काम करने के लिए उपर से फरमान किया गया है। हालांकि यह किसी भी तहर से लिखित नहीं है लेकिन सभी बड़े नेताओं  को अपने-अपने प्रदेश में सक्रिय रहने के लिए कहा गया है।

खास टीम रखेगी अपनी बात :-
विपक्ष की बेहतर भूमिका निभाने के साथ ही भााजपा को जवाब देने के लिए राष्ट्रीय स्तर नई टीम मैदान में उतार दी गई है। राष्ट्रीय प्रवक्ताओं के साथ प्रदेश के मुद्दों पर बात करने के लिए मीडिया पैनल के लिए नेताओं को रखा गया है। छत्तीसगढ़ से पूर्व सांसद देवव्रत सिंह को पैनल में लिया गया है। उन्हें राहुल गांधी की करीबियों के चलते लिया गया है। तो वहीं पहले से काम कर रहे मोहम्मद अकबर को इससे हटा दिया गया है।