जाने क्यों इस मंदिर पर जाने से क्यों खौफ खाते है लोग

धार्मिक स्थलों पर जाना किसे पसंद नही आता। भले ही इंसान उस जगह पर जाकर किसी देवी-देवता की पूजा करें या न करें, पर इस स्थान के चारों के वातावरण का सुख पानें के लिए लोग इस ओर खीचे चले ही जाते है। वैसे भी मंदिरों की बनावट, उसकी सुंदरता, कलाकृति और नक्काशी को सभी को अपनी ओर आकर्षित कर ही लेती हैं। इसी तरह से इंडोनेशिया के आइलैंड में बसी ‘जावा’ और ‘जोग्यकर्ता’ नामक जगह इन दिनों सभी का मन मोह रही है।

बौद्ध और हिन्दू धर्म से जुड़ा यह इंडोनेशिया का पारम्परिक मंदिर दुनिया के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। ‘बोरोबुदूर’ और ‘प्रम्बनन’ के नाम से। विख्यात यह मंदिर, आज बहुत से लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बताया जाता है कि हजारों साल से गुमनामी के अंधेरे में डूबे इस मंदिर को कोई नहीं जानता था। क्योंकि यह ज्वालामुखी की राख और पत्तों से कई हजार सालों तक दफन रहा। कई सालों तक इस मंदिर में किसी भी इंसान ने तो क्या, परिंदो ने भी पर नहीं मारा था। इस मंदिर की खोज 1814 में ब्रिटिश गवर्नर सर स्टैमफोर्ड के द्वारा की गई जिसका बाद में इसका नवीनीकरण कराया गया।

10वीं शताब्दी में बने इस प्राचीन मंदिर में भगवान शिव को पहला स्थान दिया गया हैं। इस मंदिर की बनावट काफी आश्चर्य चकित करने वाली है। पांच चकोर आधारों से टिके इस मंदिर में 3 गोलाकार छत बनी हुई है जिस पर 72 स्तूप बने हुए है इसमें ज्वालामुखी की राख से बने लगभग 20 लाख पत्थरों का उपयोग किया गया है। इसके अलावा पत्थरों में काफी खूबसूरत नक्काशी की गई है। 504 बुद्ध की प्रतिमाओं का अद्भुत नजारा यहां पर देखने को मिलता है। कई हजारों सालों तक ज्वालामुखी की राख के नीचे दफन बोरोबुदूर का यह मंदिर काफी सुंदर और मनमोहक है।

इस मंदिर परिसर में मौजूद कुछ स्तूप और स्मारक जीर्ण अवस्था में है, 500 से अधिक स्मारक का पुन: निर्माण किया जा चुका है और कुछ आज भी मलबे में दबे हुए है। यहां पर ज्यादा लोगों के जाने से रोक लगा दी गई है, एक बार में कम से कम 15 व्यक्ति ही इस मंदिर के अंदर प्रवेश कर सकते है।

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