Tuesday, June 19, 2018

ओंकारेश्वर….. ऊँ की पवित्र आकृति स्वरूप..द्वादश जयोतिर्लिंगों में से एक

  ओंकारेश्वर तथा महेश्वर ओंकारेश्वर:-ऊँ की पवित्र आकृति स्वरूप यह द्वीप सदृश मनोरम स्थल अनंतकाल से तीर्थ के रूप में मान्य है। यहां नर्मदा-कावेरी के संगम पर...

अमरकंटक.. नर्मदा और सोन नदियों का यह उद्गम आदिकाल से ऋ़षि-मुनियों की तपोभूमि

  अमरकंटक भारत की प्रमुख सात नदियों में से अनुपम नर्मदा का उद्गम स्थल अमरकण्टक प्रसिद्ध तीर्थ और नयनाभिराम पर्यटन स्थल है। मध्यप्रदेश के शहडोल जिले...

चित्रकूट…… ब्रम्हा, विष्णु, महेश के बाल अवतार का स्थान

  चित्रकूट प्राचीन काल में तपस्या और शांति का स्थल चित्रकूट ब्रम्हा, विष्णु, महेश के बाल अवतार का स्थान माना जाता है। वनवास के समय भगवान...

उज्जैन… महाकाल और कालभैरव

  उज्जैन पुण्य-सलिला क्षिप्रा के पूर्वी तट पर स्थित भारत की महाभागा नगरी उज्जयिनी को भारत की सांस्कृतिक-काया का मणि-चक्र माना गया है। पुराणों में उज्जयिनी,...

आर्ट आफ लिविंग के संस्थापक श्री रविशंकर ने आजीविका महाविद्यालय का भ्रमण..

अम्बिकापुर -अम्बिकापुर में स्थापित आजीविका महाविद्यालय का भ्रमण आर्ट आॅफ लिविंग के संस्थापक श्री रविशंकर ने आज अपने अम्बिकापुर प्रवास के दौरान किया। इस...

दंतेवाडा का दंतेश्वरी मंदिर

महाराजा दक्ष के यज्ञ में महासती द्वारा देह त्याग के उपरांत देवी सती के अंग जहां-जहां विमोचित हुए वहां-वहां आद्य शक्तिपीठों की स्थापना हुई।...

सरगुजा और अंबिकापुर के तीर्थ स्थल.. मां महामाया की नगरी अंबिकापुर

सरगुजा संभाग मुख्यालय अम्बिकापुर  की पूर्वी पहाडी पर प्राचिन महामाया देवी का मंदिर स्थित है।  महामाया या अम्बिका देवी के नाम पर सरगुजा संभाग...

माता चंद्रसेनी के दर्शनमात्र से शरीर में होता है,, ऊर्जा का संचार

जहां-जहां धरती पर सती के अंग गिरे थे, वहां-वहां मां दुर्गा के शक्तिपीठ स्थापना स्वमेव मानी जाती है। उसी तरह महानदी व माण्ड नदी के...

खजुराहो और कोर्णाक से कम नही “भोरमदेव”

छत्तीसगढ,, इतिहास की बहुत सी  कलाओ के  उदाहरण अपने आंचल में समेटे हुए हैं। यहां के प्राचीन मंदिरों का सौंदर्य हर तरह से खजुराहो...