Tuesday , October 17 2017
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छत्तीसगढ के पर्यटन स्थल

Tourist Places in Chhattisgarh

देखिये गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान के 12 अदभुद नज़ारे…

बरिश में लुभा रही गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान की वादियां गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान के 12 अदभुद स्थानों का रहता है बारिश में अलग ही नजारा    कोरिया सोनहत से “राजन पाण्डेय” विकासखंड सोनहत मुख्यालय से 80 किलोमीटर दूर गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में स्थित नीलकंठ ग्राम जो चारों ओर से पहाडि़यों की बीच बसा है यहां की ऊंची ऊंची पहाडि़यां अपने …

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चंदखुरी

रायपुर रायपुर से17 किलोमीटर दूर चंदखुरी को भगवान राम की मां कौशल्या की जन्म स्थली माना जाता है। यहां के मंदिरों की एक प्रमुख खास बात यह है कि यहां के मंदिर तालाब के बीच में स्थित हैं। 8 वीं शताब्दी में बना हुआ एक शिव मंदिर भी यहां है जिसका वास्तुशिल्प कमाल का है। पूजा अर्चना के लिए यहां …

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TURTURIYA IN CHHATTISGARH

तुरतुरिया : माता सीता का आश्रय स्थल

सीता माता का आश्रय स्थल लवकुश का जन्म भूमि तुरतुरिया राम के वनवास से जुडे कई स्थान छत्तीसगढ मे मौजूद है, इनमे से एक है तुरतुरिया जो राजधानीरायपुर, छत्तीसगढ़ से लगभग 150 कि.मी. दूर वारंगा की पहाड़ियों के बीच बहने वाली बालमदेई नदी के किनारे पर स्थित है। यह सिरपुर से 15 मील घोर वन प्रदेश के अंतर्गत स्थित है। यहाँ अनेक बौद्ध कालीन खंडहर हैं, …

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Amritdhara-Waterfal IN District of Chhattisgarh Korea

अमृतधारा जल प्रपात..

अमृतधारा जल प्रपात छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया ज़िले में स्थित है। सम्पूर्ण भारत में कोरिया को प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। इस ज़िले को प्रकृति ने अपनी अमूल्य निधियों से सजाया और सँवारा है। यहाँ चारों ओर प्रकृति के मनोरम दृश्य बिखरे पड़े हैं। इन्हीं में से एक ‘अमृतधारा जल प्रपात’ है, जो कि हसदो नदी पर स्थित है। प्रपात की सुन्दरता कोरिया ज़िला अपने पूरे …

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अचानकमार अभयारण्य.. Achanakmar Wildlife Sanctuary

अचानकमार वन्‍य जीवन अभयारण्‍य छत्तीसगढ  राज्य में स्थित एक वन्‍य जीवन अभयारण्‍य है। अचानकमार वन्‍य जीवन अभयारण्‍य को 1975 में तैयार किया गया था। इस अभयारण्य में वैसे तो विभिन्न प्रकार के जीव-जन्तु पाए जाते हैं, किंतु यहाँ बाघो की संख्या सर्वाधिक है।   अचानकमार वन्‍य जीवन अभयारण्‍य 557.55 वर्ग किलो मीटर के क्षेत्रफल में फैला है। बिलासपुर वन प्रभाग का उत्तर पश्चिमी वन …

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चेतुरागढ़ क़िला .. Cheturagdh Fort

चेतुरागढ़ क़िला को लाफागढ़ क़िले के नाम से भी जाना जाता है। यह 3060 मीटर ऊँचे पहाड़ पर बसा हुआ है और कोरबा से 70 किमी की दूरी पर स्थित है। चेतुरागढ़ क़िले का निर्माण राजा पृथ्वी देव ने कराया था, यह एक क़िला है इसमें तीन प्रवेश द्वार हैं, इन प्रवेश द्वारों के नाम मेनका, हुमकारा और सिम्हाद्वार हैं। चेतुरागढ़ क़िले …

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Rajiv Lochan Temple

राजिम कुंभ और अपने कलात्मक मन्दिरों के लिए प्रसिद्ध है।

राजिम छत्तीसगढ़ के रायपुर ज़िले में महानदी के तट पर स्थित है। यह अपने शानदार मन्दिरों के लिए प्रसिद्ध है। राजिम का प्रमुख मन्दिर ‘राजीवलोचन’ है जो भगवान विष्णु को समर्पित है और इसका निर्माण आठवीं शताब्दी  में हुआ था। इस मन्दिर में बारह स्तम्भ हैं। इन स्तम्भों पर अष्ट भुजा वाली दुर्गा ,गंगा,यमुना और विष्णु के विभिन्न अवतारों जैसे- राम वराह और नरसिंह आदि के चित्र बने हुए हैं। ‘राजीवलोचन …

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