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मध्यप्रदेश का इतिहास

MP HISTROY IN INDIPENDENT WAR

भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम और मध्यप्रदेश

सन् 1857 की क्रांति में मध्यप्रदेश का बहुत असर रहा। बुदेला शासक अंग्रेजों से पहले से ही नाराज थे। इसके फलस्वरूप 1824 में चंद्रपुर (सागर) केजवाहर सिंह बुंदेला, नरहुत के मधुकर शाह, मदनपुर के गोंड मुखिया दिल्ली शाह ने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत कर दी। इस प्रकार सागर, दमोह, नरसिंहपुर से लेकर जबलपुर, मंडला और होशंगाबाद के सारे क्षेत्र में …

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मध्यकाल और मध्यप्रदेश का इतिहास

हर्ष की मृत्यु के बाद सन् 648 में मध्यप्रदेश अनेक छोटे-बड़े राज्यों में बंट गया। मालवा में परमारों ने, विंध्य में चंदेलों ने और महाकौशल में कल्चुरियों की एक शाखा ने त्रिपुरा में शासन कायम किया। इस वंश के शासकों में कोमल्लदेव, युवराजदेव, कोमल्लदेव द्वितीय और गांगेयदेव ने दक्षिण कौशल तक अपनी सीमाएं बढ़ाई। विदिशा कुछ समय तक राष्ट्रकूटों के …

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मुगल काल और मध्यप्रदेश

मराठों के उत्कर्ष और ईस्ट इंडिया कंपनी के आगमन के साथ मध्यप्रदेश में इतिहास का नया युग प्रारंभ हुआ। पेशवा बाजीराव ने उत्तर भारत की विजय योजना का प्रारंभ किया। विंध्यप्रदेश में चंपत राय ने औरंगजेब की प्रतिक्रियावादी नीतियों के खिलाफ संघर्ष छेड़ दिया था। चंपतराय के पुत्र छत्रसाल ने इसे आगे बढ़ाया। उन्होंने विंध्यप्रदेश तथा उत्तरी मध्यभारत के कई …

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शुंग और कुषाण काल और मध्यप्रदेश

मौर्यों के पतन के बाद शुंग मगध के शासन हुए। सम्राट पुष्यमित्र शुंग विदिशा में थे। इनके पूर्वजों को अशोक पाटलिपुत्र ले गए थे। उन्होंने विदिशा को अपनी राजधानी बनाया। अग्निमित्र महाकौशल, मालवा, अनूप (विंध्य से लेकर विदर्भ) का राज्यापाल था सातवाहनों ने भी त्रिपुरी, विदिशा, अनूप आदि अपने अधीन किए। गौतमी पुत्र सातकर्णी की मुद्राएं होशंगाबाद, जबलपुर, रायगढ़ आदि …

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प्राचीन काल और मध्यप्रदेश

  आर्यों के भारत आगमन के साथ भारतीय इतिहास में नया मोड़ आया। ऋ़ग्वेद में “दक्षिणापथ” और “रेवान्तर” शब्दों का प्रयोग किया गया। इतिहासकार बैवर के मत से आर्यों को नर्मदा और उसके प्रदेश की जानकारी थी। आर्य पंचनद प्रदेश (पंजाब) से अन्य प्रदेश में गए। महर्षि अगस्त के नेतृत्व में यादवों का एक कबीला इस क्षेत्र में आकर बस …

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पाषाण एंव ताम्रकाल के मध्यप्रदेश का इतिहास..

 सम्यता का दूसरा चरण पाषण एवं ताम्रकाल के रूप में विकसित हुआ है। नर्मदा की सुरम्य घाटी में ईसा से 2000 वर्ष पूर्व यह सभ्यता फली फूली थी। यह मोहनजोदड़ो और हड़प्पा के समकालीन थी। महेश्वर, नावड़ा, टोड़ी, कायथा, नागदा, बरखेड़ा, एरण आदि इसके केन्द्र थे। इन क्षेत्रों की खुदाई से प्राप्त पुरावशेषों से इस सभ्यता के बारे में जानकारी …

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प्रागैतिहासिक मध्यप्रदेश…

       प्रदेश के विभिन्न भागों में किए गए उत्खनन और खोजों में प्रागैतिहासिक सभ्यता के चिन्ह मिले हैं। आदिम प्रजातियां नदियों के काठे और गिरी-कंदराओं में रहती थी। जंगली पशुओं में सिंह, भैंसे, हाथी और सरी-सृप आदि प्रमुख थे। कुछ स्थानों पर “हिप्पोपोटेमस” के अवशेष मिले हैं। शिकार के लिए ये नुकीले पत्थरों औरहड्डियों के हथियारों का प्रयोग करते …

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