Friday , October 20 2017
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आपके विचार

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वीना सिंह के लेख : परित्यक्त महिलाएं और सामाजिक वर्जनाएं

लेखिका वीना सिंह  परित्यक्ता शब्द ही पूरे तन और मन में एक पीड़ा का एहसास करा देता है। उन महिलाओं के अंर्तमन को कोई टटोल कर देखे जो निर्दोष होते हुए भी केवल पति के द्वारा ही नही बल्कि पूरे समूचे परिवार तथा समाज के द्वारा एक तिरस्कार भरा जीवन जीने को विवश हैं। आखिर उनका क्या कुसूर ? वे …

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वीना सिंह के लेख… बच्चों में घटते संस्कार…

आज भौतिक संस्कृति की बढ़ती चकाचौंध ने हमारे समाज को बुरी तरह प्रभावित किया है जिसने एक तरह की दिखावा संस्कृति को जन्म दिया है। जिसमें हर व्यक्ति अपनी ऊर्जा को प्रदर्षन में नश्ट कर रहा है। जिसका व्यक्तित्व विकास व औचित्य से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। इस दिखावे की संस्कृति से सबसे ज्यादा बच्चे और किषोर उत्साहित …

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पढ़े लेखिका – वीना सिंह का लेख.. समस्याओं से घिरा समाज

  हमारा समूचा समाज समस्याओं से ग्रसित है। हर किसी का जीवन उथल-पुथल से भरा पड़ा है। न चाहते हुए हम अनेकों समस्याओं का सामना करते रहते है। नित नई अनचाही समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। यह समस्याएं अनेको रूप में होती हैं जैसे- हिंसा  हत्या या आत्महत्या ए बलात्कार ए भ्रश्टाचार और भी अनेको ऐसे छोटे-बड़े अपराध एवं उनसे …

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कटाक्ष ! मीडिया पर ऊंगली उठाने वालो कि अब ऊंगली भी नही आ रही है नजर

मीडिया वेश्या नही दर्पण है ज़नाब  सोशल मीडिया और चंद प्रभावी अंधभक्तो ने पांच राज्यों के चुनाव नतीजो मे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की समीक्षा पर कई गंभीर सवाल उठाए थे,,  एक्जिटपोल के नतीजो के बाद मीडिया को वेश्या,  दलाल और विज्ञापन का अहसान उतारने वाला कह कर खूब माखौल उडाया था । ये सब बाते उस दौरान की गई जब देश …

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साहित्य : पं.प्रांजल शुक्ला की कलम से …..

पं. प्रांजल शुक्ला कोरबा छत्तीसगढ़   बरसात आँगन पे सावन की आई बहार, रिमझिम रिमझिम की फुहार,, बरसे रे बदरिया कही धुँवाधार, सरिता पे सदा की तरह तेज चली जब धार,, हरित हो गयी और ही हरियाली, चारो ओर छाई जब कही खुशहाली,, ऑसमा पे घटा छा रही उमड़ उमड़ कर काली, सुबह की भोर कहा गयी वो लाली,, बाग …

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राज्य के चहुंमुखी विकास में महिलाओं की भागदारी…

 रायपुर                                                                                                                                                           लेखक-सुनीता केशरवानी स्त्री जननी और मानव जीवन का आधार स्तम्भ हैं। वह घरए परिवार और समाज को मजबूती प्रदान करने वाली सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। अगर हम छत्तीसगढ़ की महिलाओं को देखेंए तो पाएंगे कि प्रदेश के विकास में उनकी बराबर की भागीदारी रही है। महिला सशक्तिकरण के पक्षधर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉण् रमन सिंह का यह मानना है …

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सांप्रदायिकता पर सियासी संवेदनशीलता के क्या कहने

पुण्य प्रसून बाजपेयी लोकसभा चुनाव से पहले और लोकसभा चुनाव के बाद के हालात बताते है कि साप्रदायिक हिंसा चुनावी राजनीति के लिये सबसे बेहतरीन हथियार हो गया है । सिर्फ मई जून में समूचे देश में 113 जगहो पर सांप्रदायिक झडपें हुईं। जिसमें 15 लोगों की मौत हुई और 318 लोग घायल हुये। वहीं महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड जहां …

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विशेष लेख …. पर्यटन के नए कीर्तिमान गढ़ता छत्तीसगढ़

रायपुर  लेखक ललित शर्मा द्वारा  छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के डेढ दशक बाद के बदलाव स्पष्ट दिखाई देते हैं। राज्य ने लगभग सभी क्षेत्रों में विकास के नए आयामों को छुआ है। सड़क, बिजली-पानी, शिक्षा, भोजन, स्वास्थ्य आदि मूलभूत सेवाओं में वृद्धि हुई है। इसके साथ ही पर्यटन के विकास क्षेत्र में राज्य ने उल्लेखनीय कार्य किया है। केन्द्रीय पर्यटन …

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नीयत, नीति और वायदों को पोटली में बाधकर निकलने का समय आ गया है मतलब नेता जी चुनाव आ गया है.

चिरमिरी से रवि कुमार सावरे… आर्टिकल नीयत, नीति और वायदों का समय, नेताजी चुनाव आ गया है कहने का तात्पर्य बिल्कुल साफ है लोकसभा चुनाव सर पर है। आदर्श आचार सहिता लागू हो चुकी है इसलिएं दलों को उनके नेताओं का प्रचार – प्रसार भी करना है और नेताजी को एसी छोड़कर सड़कों पर भी निकलना है वो सिर्फ 80 …

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हमें क्या लेना ‘आप’ से। या कि उसके उत्कर्ष से…

हमें क्या लेना ‘आप’ से। या कि उसके उत्कर्ष से। या फिर 2-जी, आदर्श, कॉमनवेल्थ और कोलगेट जैसे घोटालों से। या फिर ‘नमो लहर’ से। न तो हमें बिजली-पानी ही मयस्सर है और न भरपेट भोजन। क्या होती है सरकार और उसकी कल्याणकारी योजनाएं, हमें नहीं पता। स्कूल तो हम जाते ही नहीं और जाने के लिए हमसे कोई कहने …

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