डेंगू से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सतर्कता बरतने के निर्देश जारी

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रायपुर

वर्षा  ऋतु के आगमन के साथ महामारी के प्रकोप को फैलने से रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सर्तकता संबंधी निर्देश जारी किए हैं। इस दौरान होने वाले डेंगू बुखार के संबंध में बताया गया कि यह एक आम संचारी रोग है इसके मुख्य लक्षण हैं, तीव्र बुखार, अत्यधिक शरीर दर्द तथा सिर दर्द हैं। यह एक ऐसी बीमारी है जिसे महामारी के रूप में देखा जाता है। वयस्कों के मुकाबले, बच्चों में इस बीमारी की तीव्रता अधिक होती है। किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए राज्य स्तरीय महामारी नियंत्रण कक्ष के दूरभाष नम्बर अथवा जिलों के महामारी नियंत्रण कक्ष से सम्पर्क किया जा सकता है।
    

डेंगू के लक्षण और बचाव के उपायTodos-contra-a-dengue1

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आम भाषा में इसे ‘हड्डी तोड़ बुखार’ कहा जाता है। डेंगू के लक्षण -अकस्मात तेज सिर दर्द व बुखार का होना। ठंड के साथ मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द होना। आँखों के पीछे दर्द होना, जो कि आँखों को घुमाने से बढ़ता है। जी मिचलाना एवं उल्टी होना।गंभीर मामलों में नाक, मुँह, मसूड़ों में खून आना अथवा त्वचा पर चकत्ते उभरना। डेंगू से बचाव के उपाय इस प्रकार है- डेंगू फैलाने वाले ‘‘एडीज’’ मच्छर ठहरे हुए साफ पानी में पनपता है, अतःघर में या आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए जैसे कि कूलर, पानी की टंकी, पक्षियों के पीने के पानी का बर्तन, फ्रिज की ट्रे, फूलदान, नारियल का खोल, टूटे हुए बर्तन व टायर इत्यादि से पानी निकाल देना चाहिए। पानी से भरे हुए बर्तनों व टंकियों आदि को ढंककर रखना चाहिए। कूलर को खाली करके सुखा देना चाहिए। यदि कूलरों तथा पानी की टंकियों को पूरी तरह खाली कर पाना संभव नहीं है तो उनमें सप्ताह में एक बार पेट्रोल या मिट्टी का तेल डाल देना चाहिए। मच्छरों को भगाने व मारने के लिए मच्छर नाशक क्रीम, स्प्रे, मैट्स, कॉइल्स आदि प्रयोग करना चाहिए। यह मच्छर दिन के समय भी काटता है। अतः ऐसे कपड़े पहनना चाहिए जो बदन को पूरी तरह ढंके।
    

 

 

डेंगू के उपचार के लिए कोई खास दवा या वैक्सीन नहीं है। बुखार उतारने के लिये पैरासीटामॉल लिया जा सकता है। एस्प्रीन या आइबूप्रोफेन का इस्तेमाल अपने आप नहीं करना चाहिए। डॉक्टर की सलाह लेना चाहिए। डेंगू के हर रोगी को प्लेटलेट्स की आवश्यकता नहीं पड़ती किन्तु हेमोरेजिक डेंगू में प्लेटलेट्स निरंतर घटता है जो कि अत्यंत खतरनाक एवं जानलेवा होता है। डेंगू बुखार से ग्रस्त रोगी को बीमारी के शुरू के 6-7 दिन तक मच्छरदानी से ढ़के हुए बिस्तर पर ही रखना चाहिए ताकि मच्छर उस तक ना पहुँच पायें। इस उपाय से डेंगू बुखार से बचाने में सहायता मिलेगी। घर के आस-पास कम से कम 100 मीटर की दूरी तक कूड़ा-करकट, घास-फूस तथा गंदगी फैलने नहीं देना चाहिए