चुनावी मसाला : नगेशिया वोटरो को हल्के मे मत लेना साहब.. बिगाड सकते है सरगुजा की राजनैतिक तस्वीर…

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अम्बिकापुर…चुनाव आते ही नेताओ की जुबान की धार काफी तेज हो जाती है. औऱ वो अपना जनाधार टटोलने के लिए किसी भी तरह की बयान बाजी से बाज नही आते हैं.. ऐसा ही इन दिनो सरगुजा की राजनीति मे देखने को मिल रहा है. जहां नगेशिया जाति के वोटो को लेकर खींचतान मची हुई है. गौरतलब है अविभाजित सरगुजा मे नगेशिया जाति के वोटरो की अच्छी खासी तादाद है.. लेकिन उन वोटो मे किसी दल के नेता को काफी दिलचस्पी है तो कई को उनसे कोई फर्क नही पडता है..

  • बगैर जातिगत समीकरण के नही लड़ा जा सकता-चुनाव…
    चुनाव कोई भी हो जातिगत समीकरण के बिना लडा जाना संभव नही है. क्योकि छत्तीसगढ की मौजूदा राजनीति इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है, भाजपा हो चाहे कांग्रेस अपनी हर चुनावी बैठको मे जातिगत समीकरण को ध्यान मे रखते हुए अपनी चुनावी रणनीति तय कर रहें हैं, ऐसे मे सरगुजा मे जोगी कांग्रेस ने एक नया राजनीति गुब्बारा फोड दिया है.
    दरअसल जनता कांग्रेस छत्तीसगढ ने नगेशिया जाति के वरिष्ठ औऱ समाज के संभागीय अध्यक्ष रामजीवन नागेश को अपनी पार्टी मे शामिल कर सरगुजा की राजनीति मे अपनी पकड मजबूत करने का दावा किया है..
  • तकनीकी खामी में सुधार के बाद कांग्रेस को हो सकता है नुकसान..
    वही सरगुजा संभाग मे कांग्रेस का राजनैतिक ऐजेंडा तय़ करने वाले अम्बिकापुर से कांग्रेस विधायक औऱ छत्तीसगढ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टी.एस.सिंहदेव के मुताबिक वो पहले कम्युनिस्ट पार्टी के और भाजपा के वोटर है ,और नगेशिया समाज से नुकसान उनको होगा. बता दे की तकनीकी खामी को ठीक करने को लेकर लगातार नगेशिया समुदाय के लोग आंदोलन करते आ रहे थे.. और इस समुदाय की बात को खुद सूबे के मुखिया डॉक्टर रमन सिंह ने केंद्र सरकार के समक्ष रखा था..उसके बाद कई दौर के अनुसंधान के बाद वह तकनीकी खामी अब ठीक कर दी गई है..जिसके बाद अब आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रो में जीवन यापन कर रहे नगेशिया समुदाय के इन आदिवासियों को उनका हक मिल गया है..
  • लुण्ड्रा,सीतापुर,सामरी और रामानुजगंज है नगेशिया बाहुल्य क्षेत्र…
    जानकारी के मुताबिक अविभाजित सरगुजा जिले मे सामरी विधानसभा मे 25 हजार से अधिक नगेशिया वोटर हैं उसके अलावा लुण्ड्रा मे 15 हजार से अधिक और सीतापुर मे 10 हजार से अधिक मतदाताओ के साथ ही अम्बिकापुर मे करीब 5 हजार नगेशिया जाति के मतदाता है. ऐसे मे नेता प्रतिपक्ष का बयान आग मे घी डालने का काम कर सकता है. लेकिन टीएस सिंह के बयान पर भाजपा काफी खुश नजर आ रही है और टी.एस के इस बयान को प्रमाण पत्र बताकर नगेशिया जाति के लोगो को अपना वोटर बता रही है..

अविभाजित सरगुजा जिले की आठ विधानसभा के साथ अगर संभाग के जशपुर जिले को भी ले लिया जाए तो संभाग की तीन जिलो मे ही नगेशिया समाज के करीब डेढ लाख मतदाता है.. जो राजनीति मे किसी भी दल का बंटाधार करने के लिए काफी हैं… बहरहाल कांग्रेस के विधायक वाले रामानुजगंज, सामरी, लुण्ड्रा औऱ सीतापुर मे नगेशिया जाति के वोटर निर्णायक साबित हो सकते है.. लेकिन ऐसे मे नेता प्रतिपक्ष टी.एस.सिंह द्वारा उन्हे अपने परंपरागत वोटर ना मानने की भूल कांग्रेस के लिए नुकसान दायक हो सकती है…

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