गुण्डे है पावर ग्रिड वाले,, और गुलाम है जिला प्रशासन !

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सतना: पावर ग्रिड की गुण्डा गर्दी से सताए 3 किसान टाबर में चढ़कर जान देने को मजबूर हो गए है,, किसानो की जमीन में जबरन खड़े किए गए टाबर में पावर ग्रिड प्रवंधन ने इन किसानो को फूटी कौड़ी जमीन का मुआबजा नही दिया,, जिला प्रशासन से गुहार लगा लगा कर थक चुके ये बेबस किसानो के पास अब आत्महत्या के अलावा कोई चारा नहीं बचा,, लिहाजा मजबूर होकर अपने ही खेत मे खड़े 200 मीटर ऊंचे टाबर में चढ़ गए,, इस संवेदन सील मामले पर जिला प्रशासन की संवेदनसीलता तो देखिये,, 15 घंटे गुजरने के बाद भी जिला प्रशासन का एक नुमाइंदा भी इसके हाल पूंछने भी नहीं पहुंचा,, सुबह 8 बजे से देर रात तक भी किसान टाबर से नीचे नहीं उतरे है,, जल्द प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया तो कोई अनहोनी होसकती है !
जाने क्या है पूरा मामला:
दरसल मामला सतना के रामनगर थाना क्षेत्र के बटैया गाँव का है,, जहाँ आज 3 किसान 200 मीटर हाईटेंसन टॉवर में चढ़े हुए,,  इन किसानो के नाम  चिंतामणी पटेल,, लोली यादव,, और द्वारिका पटेल बताये जा रहे है,, जो कि टॉवर में चढ़कर जान देने की धमकी दे रहे,, बक्त बीतता जा रहा मगर उनकी समस्या का समाधान करने कोई भी प्रशासनिक अमला घटना स्थल पर जाना मुनासिब नही समझा,, पाबर ग्रिड प्रबंधन द्वारा इन किसानों को जमीन का फूटी कौड़ी मुआवजा नही दिया,, खड़ी फसल में बलपूर्बक टाबर गाड़ दिए,, ऐसे में नाराज किसान अब परेसान है,, और आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर है,, किसान और उनके परिजनों की माने तो सरकार मुआबजा दिलाने की बजाय जेल भेजने की धमकी दे रही।
दरअसल सिंगरौली से तैयार विजली को सतना जिले में स्थित सितपुरा पाबर ग्रिट तक लाने के लिए टाबर लाइन खड़ी की जा रही,, पाबर ग्रिड प्रबंधन बल पूर्वक निजी भूमि पर टाबर खड़े कर रहा और मुआवजा के तौर पर एक पैसा का भुगतान नही किया ये पहला किसान नही सैकड़ो किसान परेशान है,, और जिला प्रशासन से सिकवा शिकायत की पर नतीजा ठाक के तीन पात ही रहा,, बेवस किसान टाबर में चढ़ कर मुआबजे की मांग कर रहे,, तो प्रशासन भी उनकी समस्याओं को तबज्जो नही दे रहा,, इस पूरी घटना की जानकारी जिला प्रसासन को भी है,, बावजूद किसानो की सुध लेने कोई नहीं पहुंचा,, लिहाजा साफ़ जाहिर है की जिला प्रशासन की भूमिका भी संदिग्ध है,, अब सबाल ये उठता है कि चुनावी वर्ष में किसान की उपेक्षा कहीं सरकार को भारी न पड़ जाए भले ही लाख दाबे हो रहे कि सरकार किसान हितैसी है।
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