जमीन-जायदाद के पंजीयन के लिए ई-प्रणाली के मिलने लगे उत्साहजनक नतीजे …

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रायपुर जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री पारदर्शिता के साथ आसानी से हो सके इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भुइंया वेबसाइट (सॉफ्टवेयर) के जरिये संचालित ई-पंजीयन प्रणाली के उत्साहजनक नतीजे मिलने लगे हैं। चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2018) में प्रदेश के विभिन्न पंजीयन कार्यालयों में जमीन खरीद बिक्री के 16 हजार 044 दस्तावेजों का ऑन लाइन पंजीयन किया गया, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 12 प्रतिशत ज्यादा है।
वाणिज्यिक-कर (पंजीयन) विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि आम जनता की सुविधा के लिए राज्य में ई-पंजीयन प्रणाली लगभग सवा दो साल पहले फरवरी 2017 में शुरू की गई थी। तब से यह प्रणाली सुव्यवस्थित चल रही है। पिछले वित्तीय वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में 14 हजार 347 दस्तावेजों का पंजीयन हुआ था। अधिकारियों के अनुसार पिछले वर्ष और इस वर्ष के अकेले जून माह में हुई रजिस्ट्री के आंकड़ों की तुलना की जाए, तो पता चलता है कि इस वर्ष के जून महीने में 79 प्रतिशत ज्यादा रजिस्ट्री हुई है। जून 2017 में 9215 दस्तावेजों की रजिस्ट्री हुई थी, जबकि इस वर्ष जून 2018 में 16500 दस्तावेजों का पंजीयन किया गया। अधिकारियों ने बताया -इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि पंजीयन कार्य (भूमि संबंधी एवं अन्य) प्रति दिन नियमित रूप से निरंतर चल रहा है और पूर्व वर्ष की तुलना में इसमें काफी वृद्धि हुई है। विगत जून  2018 में चार तरीख को 998 दस्तावेजों की रजिस्ट्री हुई, जबकि पिछले साल 4 जून 2017 को सिर्फ 38 रजिस्ट्री हुई थी। इसी तरह पिछले महीने की पांच तारीख को एक हजार 022 रजिस्ट्री की गई, जो पिछले वर्ष के पांच जून के मुकाबले 242 प्रतिशत ज्यादा है। इसी तरह पिछले महीने की 9 तारीख को 1065 और 11 तरीख को 1053 और  12 तारीख को 1074 दस्तावेजों का पंजीयन किया गया।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि प्रदेश में रजिस्ट्री पर किसी प्रकार का कोई प्रतिबंध नहीं है। रजिस्ट्री करवाने के लिए अनिवार्य बिन्दु, रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के अतिरिक्त, रजिस्ट्रीकरण नियमों में ही कानूनी रूप से निर्धारित है। इसके साथ ही ऑडिट के परिप्रेक्ष्य में तथा न्यायालयों में पारित आदेशों के परिपालन में, इन नियमों को कम्प्यूटरीकृत ई-पंजीयन प्रणाली का ही एक हिस्सा बना लिया गया है।    रजिस्ट्रीकरण नियम 1939 के नियम 19 (ण) और 19(त) में ही जमीन की पहचान हेतु बी-1/खसरा/भू-खण्ड का लेख किया जाना अनिवार्य है। इसके साथ ही प्रत्येक भूमि का कुल रकबा में से कितना रकबा रजिस्ट्री के लिए विचार में लाया जा रहा है, का भी स्पष्ट उल्लेख एवं चिन्हाकंन होना अनिवार्य, विधिक प्रावधान है। जमीन किसके नाम पर वर्तमान में दर्ज है और उसके रकबा संबंधी जानकारी, राजस्व विभाग के अभिलेखों से ही प्राप्त होती है। पूर्व में यह मैनुवली प्राप्त होता था। अब यह ऑनलाईन हो गया है और दोनों विभागों, पंजीयन एवं राजस्व, के साफ्टवेयर आपस में जोड़कर कार्य निष्पादन निरंतर चल रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में विशेष उल्लेखनीय है कि दस्तावेजों के साथ रजिस्ट्रीकरण नियम-19 के तहत कृषि भूमि, भवन/भूखण्ड के दस्तावेजों के संबंध में, राजस्व विभाग द्वारा कम्प्यूटरीकृत बी-1, पांचसाला, खसरा ही मान्य होगा तथा इस बेची गई सम्पत्ति के खसरों एवं रकबों का राजस्व विभाग के भुइंया सॉफ्टवेयर से सत्यापन होना भी अनिवार्य है। इस सॉफ्टवेयर में कृषि भूमि के साथ नजूल एवं व्यपवर्तित भूमि का सत्यापन भी किया जाना अनिवार्य है। सत्यापन के बाद ही दस्तावेज पंजीयन के लिए स्वीकार किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि भूमि के पंजीयन के लिए भूमि संबंधित दस्तावेज के रूप में पक्षकारों द्वारा पटवारी के हाथ से लिखा हुआ मैन्युएल नकल न ले जाकर, कम्प्यूटरीकृत नकल प्रस्तुत करना चाहिए। यह कम्प्यूटरीकृत नकल भुइंया वेबसाईट से कोई भी प्राप्त कर सकता है। यह आम जनता की सुविधा के लिए रखा गया है। पंजीयन अधिकारियों ने कहा कि कुछ लोगों को यह भ्रांति है कि  बिना खसरा नम्बर सत्यापन के दस्तावेज पंजीयन हेतु स्वीकार किया जाता है, जबकि ऐसा नहीं होता। इसलिए पक्षकारों (खरीददारों) को पंजीयन करवाने के पहले यह परख लेना चाहिए कि उनके द्वारा खरीदी जा रही संपत्ति का भुइंया साफ्टवेयर में सत्यापन हो रहा है या नहीं। मिलान नही होने की स्थिति में पंजीयन कार्य नही हो पाएगा। भुइंया साफ्टवेयर (वेबसाइट) में अभिलेख सुधार अथवा अपडेशन का कार्य राजस्व विभाग से संबंधित है। किसी भी सुधार अथवा अपडेशन के लिए आवेदक संबंधित तहसीलदार से सम्पर्क कर सकते हैं। सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत विलेखों का, भुइंया सॉफ्टवेयर से सत्यापन के बाद प्रदेश के सभी उप पंजीयक कार्यालयों में ई-पंजीयन सॉफ्टवेयर के माध्यम से पंजीयन आसानी से हो रहा है।
अधिकारियों ने बताया – नजूल भूमि और परिवर्तित भूमि, दोनों ही स्थितियों में पटवारियों का रिकार्ड जिला स्तर से अद्यतन होना चाहिए था, जो कि विगत कुछ वर्षाें से लम्बित रहा। इस वजह से राजस्व विभाग द्वारा भुइंया सॉफ्टवेयर में अलग से नजूल और परिवर्तित भूमि के संधारण खसरों की अद्यतन जानकारी राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एनआईसी) के माध्यम से इस महीने की पांच तारीख को भुइंया सॉफ्टवेयर में अपलोड कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में नजूल संपत्ति के बारे में प्राधिकृत अधिकारी से प्रमाणित नजूल संधारण खसरा में उल्लेखित नजूल शीट क्रमांक और ब्लॉक क्रमांक और भूखण्ड क्रमांक को पंजीयन के लिए राजस्व विभाग द्वारा मान्य किया गया है। इसके बाद से ई-पंजीयन सॉफ्टवेयर के जरिये ’भुइंया ’ से शीट क्रमांक और ब्लाक क्रमांक का भूखण्ड क्रमांक का सत्यापन होने के बाद दस्तावेजो का पंजीयन हो रहा है।
अधिकारियों के अनुसार राजस्व विभाग द्वारा भुइंया सॉफ्टवेयर में 1,331 नजूल शीट और उनसे जुडे सभी प्लाट संबंधित जानकारी ऑनलाईन कर दिए गए हैं।    चालू जुलाई महीने की 5 से 7 तारीख तक नगरीय निकायों में नजूल भूमि की 20 रजिस्ट्री पूर्ण की गई है। इनमें रायपुर की दो, बिलासपुर की छह, राजनांदगांव की तीन, धमतरी की तीन, जगदलपुर की पांच और बलौदाबाजार की नजूल रजिस्ट्री शामिल हैं। इसी तरह राजस्व विभाग द्वारा भुइंया में 1525 परिवर्तित मेन्टेनेंस खसरा के मास्टर शीट और उनसे जुडे सभी भू-खण्डों से संबंधित जानकारी भी ऑनलाईन की जा चुकी हैै। इस प्रकार की पूर्ण एवं अद्यतन हो चुकी नजूल और परिवर्तित, दोनों प्रकार के भू-खण्डों का पंजीयन, ई-पंजीयन के जरिये कानूनी रूप से किया जा रहा है। अधिकारियों ने लोगों से इस तकनीकी सुविधा का लाभ लेने की अपील की है।

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