सीएम के अमेठी में विकास खोजने के बयान के बाद..कांग्रेस ने दी सीएम को नसीहत..कहा अपने भाषण लिखने वालों को दे अध्ययन करने की सलाह…

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रायपुर  मुख्यमंत्री रमन सिंह द्वारा अमेठी के विकास के संदर्भ में दिये गये बयान पर कांग्रेस ने कड़ा प्रतिवाद किया है। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि रमन सिंह को अपना भाषण लिखने वालों को और अध्ययन करने की सलाह देनी चाहिये ताकि वे लगातार कर रहे गलत बयानी के कारण जग हंसाई से बच सके। रमन सिंह का भाषण लिखने वाले लोग कूपमंडूप बने हुये है। उन्हे देश दुनिया की कोई जानकारी नहीं है,या फिर वे जानबूझ कर झूठ  बोल रहे हैं। अमेठी विकास का माईलस्टोन है।

अमेठी में हिन्दुस्तान एरोनाटिकल (एच.ए.एल), इंडोगोल्फ फर्टिलाइजर बी.एच.ई.एल प्लांट, इंडियन आईल की यूनिट विशाल फूड प्रोसेसिंग इकाई  तमाम शैक्षणिक और तकनीकी संस्थान है। अमेठी से लगे रायबरेली में एन.टी.पी.सी., सिमेंट फैक्ट्री, रेलकोच फैक्ट्री, आईआईटी जैसी इकाईयां और उद्योग लगे है। राजीव गांधी पेट्रोलियम इंन्टीट्यूट जैसा देश का ख्यातिनाम संस्थान यहां है, महिला विश्वविद्यालय एम्स जैसे संस्थान अमेठी में बने है। 70 फीसदी इलाका सौर ऊर्जा आच्छादित है।अमेठी के जगदीशपुर इलाके में 300 से अधिक प्लांट लगे है। पूरे अमेठी में न सिर्फ नहरों का जाल बिछा है शत-प्रतिशत अमेठी सिंचित कृषि रकबा वाला लोकसभा क्षेत्र है।कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि विकास के नाम पर छत्तीसगढ़ को डेढ़ दशक पीछे ढकेलने वालों के मुंह से विकास की बातें हास्यास्पद लगती है। रायपुर लोकसभा में जो भी केन्द्रीय संस्थान आये हैं वह केन्द्र की कांग्रेस सरकारों की देन है। रमन के शासन काल में रायपुर विकास की दौड़ में पिछड़ गया है। रायपुर देश के सबसे जादा प्रदूषित शहरों में से एक है, भाजपा सरकार की उद्योग विरोधी नीति के कारण रायपुर की आधी आद्योगिक इकाईयां बंद है, जो चालू है वह उत्पादन से ज्यादा प्रदूषण पैदा कर रही है। रायपुर के लोगों को भाजपा सरकार पीने का साफ पानी तो उपलब्ध नहीं करवा पा रही, कमीशनखोरी करने के लिये विकास के नाम पर औचित्य और उपयोगहीन स्काई वाक बनवा दिया गया। जिस प्रदेश में  एक साल में डायरिया जैसी बीमारी से 1500 से अधिक लोगों की मौते होती हो जहां राजधानी से मात्र 85 किमी दूर सूपेबेड़ा में पीने का साफ पानी नहीं मिलने के कारण पूरे गांव की किडनी खराब हो जाती हो, जहां  नसबंदी जैसे मामूली आपरेशन में 17 महिलाओं की मौत हो जाती हो, जिस प्रदेश में आंख के आपरेशन के सरकारी शिविर में नकली दवाओं के कारण 100 से अधिक बुजुर्गो की जान चली जाये जिस प्रदेश में पैसो के लिये महिलाओं के गर्भाशय निकाल लिये जायें, जिस प्रदेश के सरकारी आश्रमों में मासूम बच्चियों के झलियामारी जैसी घृणित दुराचार की घटनायें होती है। जिस प्रदेश में किसानों को फूड प्रोसेसिंग यूनिट और भंडारण की सुविधा न होने के कारण टमाटर सब्जियां सड़को पर फेकने की नौबत आये उस प्रदेश के मुखिया के विकास की चुनौती का कोई भी जवाब प्रदेश की जनता 2018 के विधानसभा चुनाव में खुद देगी।

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