स्कीइंग चैंपियन को ..राजनीति की वजह से ..ओलम्पिक गेमों में जाने से रोका गया..

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सौजन्य-ANI

नई दिल्ली : एक ऐसी प्रतिभाशाली खिलाड़ी जिसके पास देश को गौरव दिलाने का हुनर और जज्बा था लेकिन इस जुनून पर एसोसिएशन में हो रही राजनीति भारी पड़ गई। राशिल कंवल की कहानी जानने के बाद आपको काफी हद तक यह बात समझ में आ जाएगी कि भारत ओलंपिक जैसे बड़े आयोजनों में क्यों पीछे रह जाता है। साथ ही यह भी कि भारत में खिलाड़ियों की प्रतिभा और देश के लिए मेडल जीतने की ललक को कितनी गंभीरता से लिया जाता है।

शिमला की यह 24 वर्षीय खिलाड़ी अपनी छोटी उम्र में कई कीर्तिमान गढ़ चुकी हैं। राशिल कंवल केवल ढ़ाई साल की थीं जब उन्होंने अपने अंदर स्कीइंग के प्रति पनप रही दिलचस्पी को पहचान लिया। साथ ही शीतकालीन खेलों के लिए मशहूर हिमाचल प्रदेश के नरकडा में उन्होंने अपने इस शौक की ओर कदम भी बढ़ा दिए। आज राशिल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक पेशेवर भारतीय खिलाड़ी के तौर पर नए कीर्तिमान गढ़ने के लिए तैयार हैं लेकिन बीते समय में भी वह कामयाबी के कई किस्से लिख चुकी हैं।

राशिल बर्फ पर अपना हुनर दिखाने में माहिर हैं और स्कीइंग की चैम्पियन हैं। इस समय वह आगामी शीत कालीन ओलंपिक की तैयारियों में जुटी हैं। इसके अलावा वह पूर्व ओलंपियन और विश्वकप विजेता जियोर्जियो रोक्का की देखरेख में स्विटरजरलैंड की एकेडमी में ट्रेनिंग भी शुरू करने जा रही हैं। फिलहाल उनका लक्ष्य ओलंपिक में हिस्सा लेने के लिए जरूरी रेस स्पर्धाओं को क्वालीफाई करने पर है।

राशिल ने बीते समय में कई मुश्किलों का सामना किया है। जब एक बातचीत के दौरान राशिल से उनके संघर्षों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि एकेडमी के अंदर राजनीति के वजह से उन्हें अपना कीमती समय और अवसरों को गंवाना पड़ा। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों और एसोसिएशन के अंदर होने वाली राजनीति की वजह से उन्हें युवा ओलंपिक आयोजनों में हिस्सा लेने से रोका गया..
दरअसल ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने के लिए दुनिया भर में होने वाली प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हुए अंक हासिल करने होते हैं। राशिल को भी युवा ओलंपिक्स में हिस्सा लेने के लिए 140 अंक जुटाने थे लेकिन उन्हें किसी भी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए मौका ही नहीं दिया गया। जबकि वह देश की नंबर एक खिलाड़ी थीं..

इससे पहले साल 2005 में खेल के दौरान लगी चोट भी राशिल के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। इस दौरान उनका खेल करियर अनिश्चितता और अंधकार में नजर आ रहा था लेकिन हौसला, हिम्मत और तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद राशिल ने वापसी की और 2008 में हुई नेशनल चैम्पियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीते और इसके बाद साल 2012 में भी उन्होंने इसी तरह पदक जीतते हुए अपनी लय बरकरार रखी, चार राष्ट्रीय आयोजनों में वह 8 मेडल हासिल कर चुकी राशिल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सात बार स्कीइंग में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर बास्केटबॉल प्रतियोगिता में भी हिस्सा लिया है।

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