बसपा में रत्नाकर की वापसी से पामगढ़ विधायक अम्बेश की मुश्किलें बढ़ी…पामगढ़ से तीन बार विधायक रह चुके है रत्नाकर

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जांजगीर चाम्पा संजय यादव-  उत्तर प्रदेश में बसपा केे सुप्रीमो मायावती ने सपा से हाथ मिला कर भारतीय जनता पार्टी को उप चुनाव में मुश्किल में डाल दिया है । ठीक उसी प्रकार छत्तीसगढ़ में भी अपनी दमदारी दिखाकर आने वाले विधान सभा चुनाव में सीटो की संख्या बढ़ाने के लिए अपने पार्टी के पुराने वरिष्ठ नेताओं की घर वापसी कर एक नया समीकरण बना कर भाजपा को मात देने की कोशिश की जा रही है। पामगढ़ विधान सभा से बसपा से तीन बार विधायक रहे वरिष्ठ नेता दाऊ राम रत्नकर की वापसी पार्टी में की है।  उसी प्रकार पूर्व सीपत विधायक रामेस्वर खरे,उदल किरण,आरसी बेझिल की घर वापसी हुई है। रत्नाकर की वापसी से पामगढ़ विधानसभा के बसपा कार्यकर्तओं में खुशी की लहर है तो दूसरी और भाजपा विधायक के लिए मुसीबत खड़े कर दिए है ।पामगढ़ विधानसभा में पहली बार भाजपा को ये सीट हासिल हुई थी। पामगढ़ विधानसभा आरक्षित सीट होने के साथ बसपा की गढ़ मानी जाती है। वही आने वाले समय मे अम्बेश जांगड़े के लिए पामगढ़ विधानसभा से जीत पाना कठिन हो सकता है। रत्नाकर की वापसी से पुराने समर्थको में भारी खुशी की लहर है इसका स्वागत फटा का फोड़ ,मिष्ठाई बाट कर किया है। पामगढ़ विधानसभा सीट जाति समीकरण में देखा जाय तो एस सी बहुल क्षेत्र होने के चलते बसपा की बड़ी वोट बैक इस क्षेत्र में है। इसलिए रतनाकर की वापसी से भाजपा के लिए जरूर चिंता का विषय बन गया है। अब आने वाले समय मे देखना होगा रत्नाकर की वापसी में बसपा के लिए संजीवनी की काम करती है या भाजपा आपनी सीट बरकरार रख पाती है ।
जोगी से साठ गाठ का लगा था आरोप
दाऊ राम रतनाकर 2011 में पार्टी विरोधी काम करने व अजीत जोगी के साथ मिलकर पार्टी को नुकसान पहुचे का आरोप के कारण बसपा से निकासित कर दिए गए थे। वही उन्होंने निकाशन में बाद अपनी खुद की पार्टी बहुजन समाज मुक्ति मोर्चा नाम से पार्टी बना ली थी। एक समय था जब प्रदेश में बसपा की तीन सीट अपने पास थी। पर एक समय ऐसा आया बसपा सिर्फ एक सीट जैजै पुर में ही सिमट कर रह गई।
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