चढ़ती है मदिरा और दी जाती है बकरे की बलि… खोपा देवता के नाम से प्रसिद्ध है यह धाम… प्रशासन की उपेक्षाओं की झेल रहा दंश…

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सूरजपुर आयुष जायसवाल देवी-देवताओं की पूजा तो सभी करते है , लेकिन क्या आपने सुना है लोग दानव की भी पूजा करते है , आज हम आपको बताने जा रहे है ऐसे ही एक गॉव के बारे में जहाँ दानव को भगवान मानकर उनकी पूजा की जाती है और गांव ही नहीं बल्कि पूरे छत्तीसग़ढ सहित अन्य प्रदेशों से लोग मन्नत लेकर आते हैइस धाम के बारे में कहा जाता है कि की सच्चे दिल से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है ,यह धाम सूरजपुर जिले के भैयाथान ब्लाक के ग्राम खोपा में स्थित है जो दतिमा मोड़ से 8 की.मि की दुरी पर स्थित है

बनकासुर दानव की होती है पूजा –

बताया जाता है कि अनादि काल से ही यहा विराजमान बनकासुर दानव की पूजा की जाती है जिसको अब खोपा देवता के नाम से पूजा जाता है खुले मैदान में ही सैकड़ो  सालो से प्राचीन पत्थर की इस प्रतिमा में दानव का चेहरा निर्मित है साथ ही खोपा दाई, बूढी माई, जलहल देवता , कुदरगढ़ी दाई, छुरीपाट, और संकर पाट की पत्थर रूपी मुर्तिया स्थापित है बताया जाता है कि यहा आस पास तथा दूर दूर से आने वाले लोग मन्नत पूरी होने पर बकरे की बलि व शराब का चढ़ावा चढ़ाते है जो अनिवार्य है , और बैगा के माध्यम से मन्नत पूरी होने पर चढ़ावे को स्वीकार करने की अपील की जाती है

पाताल से देवता को दो बैगा आये थे नही बन सकता मंदिर-

वहा के ग्रामवासी तथा बैगा द्वारा बताया जाता है कि आदिम काल से वही के दो बैगाओं द्वारा नदी के रास्ते से खोपा देवता को लाया गया था और खुले मैदान में ही उनकी मूर्ति को स्थापित किया गया था , साथ ही ये कहा जाता है कि खोपा देवता का मंदिर नही बन सकता बहुत प्रयास करने पर भी मंदिर का रूप नही दिया जा सका क्योंकि यहा जो देवता है हो दानव थे तो उनका मंदिर निर्माण नही हो सकता वे बाहर ही रहते है

अब महिलाएं भी खा सकती है यहा का प्रसाद-

पहले महिलाएं यहा का प्रसाद नही खा सकती है और पूजा में भी दूर बैठना पड़ता था जिसका कुछ कारण है लेकिन अब बैगा से पूछने पर बताया गया कि महिलाएं भी यहा का प्रसाद खा सकती है और पूजा भी कर सकती है , और खोपा देवता में चढ़े प्रसाद को बाहर ही बनाकर सेवन करना पड़ता है इसे घर ले जाकर नही खाया जाता है

बाहरी प्रदेशो व दूर से आने वालों के लिए बैगा देते है उचित व्यवस्था-

अन्य राज्यो व दूर से आने वाले भक्तों के लिए वहा के बैगा सुखलाल राजवाड़े द्वारा ही रुकने व खाने की व्यवस्था दी जाती है क्योंकि खोपा धाम की पूजा सुबह से ही शुरू हो जाती है रेण नदी के किनारे बसा है खोपा धाम जहा और भी कई मनोरम दृश्य है जिसे पिकनिक स्पॉट या दर्शनीय स्थल के रूप में विकसीत किया जा सकता है

जिला प्रशासन ने नही की कोई पहल –

वही आसपास के जनप्रतिनिधियो व ग्रामवासियो ने जिला प्रशासन पर मुह फेरने का आरोप लगाया है आज तक इस प्रसिद्ध स्थल में  शासन द्वारा कोई पहल नही किया जाना समझ से परे है

 

 

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