कागजों में चल रही संस्था.. 85 लाख रुपये के भुगतान में बंदरबाट..आरटीआई से हुआ खुलासा..!

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अम्बिकापुर समाज कल्याण विभाग की महात्वाकांक्षी घरौंदा योजना में लाखों के बंदरबांट का आरोप आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर लग रहा है। दिव्यांग, निराश्रित व बुजुर्गों के सहायतार्थ आश्रय गृह घरौंदा के संचालन के नाम पर समाज कल्याण विभाग द्वारा पिछले चार वर्षों में एक स्वैच्छिक संस्था को 85 लाख रुपए का भुगतान किया गया है। जिम्मेदार अधिकारियों के निरीक्षण में आश्रयगृह में 18 लोग ही निवास करते पाए गए हैं। इनकी सुविधाओं को लेकर प्रतिकूल टिप्पणी करने के साथ ही शासकीय राशि के अपव्यय पर रोक लगाने का उल्लेख निरीक्षण टीप में किया जा चुका है, बावजूद समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों द्वारा कमीशन के चक्कर में मनमाने तरीके से राशि का भुगतान कर दिए जाने का आरोप आरटीआई एक्टिविस्ट व अधिवक्ता डीके सोनी ने लगाया है।

 

उन्होंने यह भी दावा किया है कि अंबिकापुर में घरौंदा योजना के तहत्‌ आश्रयगृह खोला ही नहीं गया है। सिर्फ कागजों में संचालन दिखाकर बंदरबांट किया गया है। प्रेसवार्ता में श्री सोनी ने बताया कि समाज कल्याण विभाग के माध्यम से दिव्यांग,निराश्रित व जरूरतमंद गरीबों,बुजुर्गों के लिए घरौंदा योजना का संचालन किया जा रहा है। योजना के तहत्‌ सरगुजा जिले के लिए वर्ष 2014-15 में 50 लाख रुपए आबंटित किए गए थे। यह राशि एक स्वैच्छिक संस्था को आबंटित कर दी गई। सूचना के अधिकार के तहत्‌ प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर अधिवक्ता डी के सोनी ने बताया कि वर्ष 2015-16 में उसी संस्था को 10 लाख रुपए, 2016-17 में 25 लाख रुपए तथा 2017-18 में 20 लाख रुपए आबंटित किए गए। इसमें से 85 लाख रुपए का भुगतान भी कर दिया गया है। वर्ष 2017-18 की 20 लाख की राशि भी आबंटित कर दिए जाने का संदेह जताते हुए उन्होंने मुख्य सचिव छग शासन,कमिश्नर व कलेक्टर सरगुजा को ज्ञापन प्रेषित कर आश्रयगृह घरौंदा का संचालन किए बगैर शासकीय राशि हजम कर लिए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जिस स्वैच्छिक संस्था द्वारा आश्रयगृह घरौंदा का संचालन किए जाने की जानकारी आरटीआई के तहत्‌ समाज कल्याण विभाग द्वारा दी गई है, उसमें पता मणिपुर अंबिकापुर बताया गया है। जबकि उक्त पते पर ऐसी कोई संस्था संचालित ही नहीं हो रही है। कागजों में संस्था संचालन बताकर गरीबों,निराश्रितों, बुजुर्गों के नाम पर बड़ा घोटाला किया गया है। उन्होंने शिकायत की जांच समाज कल्याण विभाग से न कराकर अलग से एक टीम बना कराने की मांग की है। टीम में जिला स्तर के दो अधिकारी,दो मीडिया प्रतिनिधियों, दो सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ शिकायतकर्ता को भी शामिल किए जाने का आग्रह किया है।

 

आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर अधिवक्ता डी के सोनी ने कहा है कि स्थानीय स्तर पर 9 नवंबर 2016 को अधिकारियों द्वारा किए गए निरीक्षण में आश्रयगृह घरौंदा में 18 हितग्राहियों के लाभांवित होने का उल्लेख किया गया है। एक अप्रैल 2014 से संस्था का संचालन किया जा रहा है। अभी तक दस्तावेज बताते हैं कि 85 लाख रुपए का भुगतान किया जा चुका है। सिर्फ 18 लोगों पर इतनी बड़ी राशि इतने कम समयावधि में आसान नहीं है। क्योंकि डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी की जांच में आश्रयगृह संचालन में अनियमितता पाई गई थी। उन्होंने शासकीय राशि के अपव्यय पर रोक लगाने की अनुशंसा की थी।

 

अधिवक्ता डी के सोनी ने मय दस्तावेज बताया है कि समाज कल्याण विभाग की तत्कालीन संचालक किरण कौशल ने 10 फरवरी 2016 को तत्कालीन सरगुजा कलेक्टर को पत्र प्रेषित कर उल्लेख किया था कि संचालनालय स्तर से गठित दल द्वारा अंबिकापुर में संचालित स्वैच्छिक संस्था के आश्रयगृह का 30 दिसंबर 2015 को निरीक्षण किया गया था, जिसमें कई त्रुटियां सामने आई थी। जिला स्तर से भी संस्था का निरीक्षण करा न्यूनताओं की पूर्ति कराते हुए नियमानुसार राशि जारी करने कहा गया था,लेकिन समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने कमियों को दूर करने की पहल नहीं की और राशि का भुगतान कर दिया।जुलाई 2016 में सरगुजा के तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर द्वारा की गई जांच रिपोर्ट को भी अधिवक्ता डी के सोनी ने सार्वजनिक कर अवगत कराया कि निरीक्षण में संस्था द्वारा डिप्टी कलेक्टर को खाद्यान्न पंजी नहीं दिखाया गया था। चिकित्सा, बिजली, पानी, रिक्रेशन व अन्य खर्चों की रसीद भी नहीं दिखाई गई थी। संस्था में भोजन व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता जता हितग्राहियों के अनुपात के अनुरूप शासकीय राशि खर्च करने सुझाव दिया गया था ताकि अपव्यय की स्थिति को रोका जा सके।

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