झीरम नक्सली हमले से पहले अजीत जोगी के हेलीकाप्टर से वापस लौटने पर कांग्रेस की सियासत..!

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रायपुर झीरम घाटी हमले से पहले अजीत जोगी द्वारा हेलीकाप्टर से वापस आने का मामले में कांग्रेस ने सवाल खड़े किये है.. कांग्रेस ने अजीत जोगी के वापस आ जाने के मामले में कई शंकाओं को जन्म देने वाला बताया है.. साथ ही विधान मिश्र के खिलाफ भी बयान बाजी की है.. इस सम्बन्ध में छजकां नेता के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये शहीद पं. विद्याचरण शुक्ल के निकट सहयोगी रहे छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारिणी सदस्य दौलत रोहड़ा ने प्रेस रिलीज के माध्यम से कहा कि विधान मिश्रा अपनी बंद पड़ी राजनैतिक दुकान चमकाने गलत बयानी कर रहे है। विधान और कुछ अन्य तथाकथित नेता पंडित विद्याचरण शुक्ल के नाम से उनके जीते जी राजनीति करते रहे है और स्वार्थ सिद्धी के लिये स्व. विद्या भैया से विश्वासघात भी किया था, आज वही नेता विद्या भैया के निधन के बाद भी उनका नाम लेकर फिर अपनी राजनीतिक रोटी सेकने की कोशिशे कर रहे, यह बड़े शर्म की बात है। शहीद पं. विद्याचरण शुक्ल के घोर विरोधी अजीत जोगी जिनने विद्या भैया को जीते जी अपमानित करने की लगातार कुचेष्टा किया। जोगी की गोद में बैठकर विधान मिश्रा द्वारा इस प्रकार की बयानबाजी करना विधान की अवसरवादिता है। विधान मिश्रा का बयान राजनैतिक स्वार्थ के चलते दिया गया बयान है।

परिवर्तन यात्रा के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शहीद नंदकुमार पटेल ने तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस महामंत्री भूपेश बघेल को पुष्प स्टील मामले में भाजपा सरकार की दोहरी नीति को बेनकाब करने का काम सौंपा था। स्व. पटेल की मंशा के अनुरूप भूपेश बघेल इस कार्य को अंजाम दे रहे थे। इसे लेकर विधान मिश्रा द्वारा गलत एवं आधारहीन बयानबाजी की जा रही है। विधान मिश्रा भी तो उस समय प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री थे तथा पूर्व मंत्री की हैसियत से परिवर्तन यात्रा में उनको भी शामिल होना था लेकिन विधान खुद भी शामिल नहीं हुये उनके वर्तमान आका जीरम हमले के ठीक पहले हेलीकाप्टर से रायपुर वापस आ गये। उनके इस हेलीकाप्टर से जाने आने के कारण भी अनेक आशंकायें, कुशंकायें जन्म लेती है।

यह भी कहा गया की शहीद पंडित विद्याचरण शुक्ल के नाम से अगर छत्तीसगढ़ सरकार किसी बड़े संस्थान का नामकरण करती है, तो हम उनका स्वागत करते है। कांग्रेस ने तो नये रायपुर के संस्थानों, भवनों, सड़को और चौराहो का नाम जीरम के शहीदो के नाम पर किये जाने की मांग लगातार की है लेकिन भाजपा सरकार द्वारा इनका नामकरण पं. दीनदयाल उपाध्याय के नाम किया जा रहा है। इसके खिलाफ विधान मिश्रा के कुछ न बोलने से  भाजपा और छजकां की मिली भगत बेनकाब हो गयी है।