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हड़ताल तो शून्य पर वापस पर कार्यवाही शून्य नही हुई…

सूरजपुर 9 सूत्रीय मांग को लेकर प्रदेश भर के शिक्षक पंचायत 20 नवम्बर से अनिश्चित कालीन आंदोलन में शामिल हुये थे दो बार की वार्ता के बाद भी आंदोलन 15 दिन चला और 5 दिसम्बर को सभी पंचायत शिक्षक काम पर लौट आये है । इस दौरान निलंबन से लेकर बर्खास्तगी तक की कार्यवाही के साथ पदाधिकारियों को जेल तक भेजा गया । इस समबन्ध में मोर्चा के नेता रंजय सिंह ने बताया कि कार्यवाही शून्य करने की शर्त के साथ आंदोलन शून्य पर वापस ले लिया गया परन्तु पुरे प्रदेश में मात्र सूरजपुर जिले में जिला अधिकारियो द्वारा हड़ताल के कारण लम्बे समय से पदस्थ समस्त संकुल समन्वयक पंचायत शिक्षकों को हटाते हुये नियम कायदे का ध्यान दिये बिना नियमित शिक्षकों को कार्य करने का आदेश 29 नवम्बर को जारी कर दिया गया है । कई जगह प्राथमिक शाला के प्रधान पाठक को बनाया गया है तो कई जगह संकुल प्रभारी को ही संकुल समन्वयक बना दिया गया है । जो गलत है अब ये सवाल उठता है कि आन्दोलन के दौरान के समस्त कार्य वाही शून्य होगी तो इस पर होगी की नही ।

बिदित हो की शिक्षा विभाग की रीढ़ संकुल समन्वयक को ही माना जाता है जो कंप्यूटर के साथ एंड्राइड फ़ोन चलाना जानते है जब की कई नियमित शिक्षक कम्प्यूटर की abc भी नही जानते , शाला कोष शासकीय बिद्यालय में लागू किया जाना है जिसमे संकुल समन्वयक की भूमिका महत्वपूर्ण है ।ऐसी स्थिति में बिना पंचायत शिक्षकों को शामिल किये यह कार्य करा पाना संभव है या यह आदेश भी निरस्त होगी ।
शिक्षक पंचायत के नेताओ ने इस मुद्दे को प्रदेश स्तर पर उठाने का भी मन बना रहे है ।

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