दिल्ली का पुराना किला..

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यह किला प्रगति मैदान से ज्‍यादा दूर नहीं है यह किला काफी निर्जन स्‍थान पर चारों तरफ बहुधा हरियाली है। दिल्‍ली इन्‍द्रप्रस्‍थ के कई अति प्राचीन शहरों के अवशेष पर निर्मित पुराना किला लगभग दो किलामीटर की परिधि में लगभग आयताकार में है।

 

इसकी मोटी प्राचीरों को कंगूरों द्वारा सुसज्जित किया गया इसमें तीन मार्ग है जिसके दोनों ओर बुर्ज लगाए गए हैं। इसके चारों तरफ खंदक है जो यमुना नदी से जुड़ी है जो किला के पूर्वी ओर बहती है। उत्‍तरी द्वार को तलाकी दरवाजा या परित्‍यक्‍त द्वार कहते हैं। जो पारंपरिक इस्‍लामिक उत्‍कीर्ण मेहराब के साथ हिन्‍दू छतरियों और ब्रेकटों का समिश्रण है जबकि दक्षिणी दरवाजे को हुमायूँ दरवाजा कहते हैं ये भी इसी तरह बना है।

 

पुराने किले के बड़े दरवाजे और दीवारें हुमायूँ द्वारा निर्मित कराए गए थे जिसे 1534 ई. में नई राजधानी दीनपनाह नाम दिया गया था। शेरशाह सूरी जिसने हुमायूँ को पराजित किया था, ने पुराने किले में कुछ नई इमारतें बनवाईं। यहां प्रत्‍येक सायंकाल में भव्‍य साउंड एन्‍ड लाइट शो का आयोजन किया जाता है।

 

कहां स्थित है: महरौली
नज़दीकी मेट्रो स्टेशन:
कुतुब मीनार
खुलने के दिन: प्रतिदिन
प्रवेश शुल्क : 10 रु. (भारतीय), 250 रु.
(विदेशी)
बंद रहने के दिन: कोई नहीं

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