रोजगार की तलाश में पहुची मुंबई… 3 साल बाद एक NGO ने मिला दिया परिवार से…

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बतौली (निलय त्रिपाठी) अच्छी पगार के लालच में काम करने 3 वर्ष पूर्व गई युवती को मुंबई से लगे ठाणे के बोईसर कि एक एनजीओ संस्था ने युवती को गृहग्राम लाकर सरपंच के मौजूदगी मैं परिजनों को सौंपा। बतौली थाना अंतर्गत ग्राम बाजीकोना शिवपुर निवासी घेरटा यादव की 25 वर्षीय पुत्री घनमति यादव उर्फ पूनम यादव जाति बरगाह जो करीब 3 वर्ष पूर्व अच्छी पगार के लालच में काम करने के लिए अपने बुआ के लड़के नेहरु यादव के माध्यम से घर से निकल मुंबई पहुंची जहां काम करने के लिए एक व्यापारी के घर में छोड़ा, जहां युवती 1 वर्ष तक घर का कामकाज व बच्चों का देखरेख करती रही! जिसके बाद मुंबई से अकेले वापस घर आ गई। पर घर में मन नहीं लगने से युवती पुनः 4 माह बाद अकेले ट्रेन से रायपुर होते हुए मुंबई पहुंच गई जहां राहुल व रिया नामक मुस्लिम परिवार नेरुल वाशी नवी मुंबई के घर पहुंच 2 माह तक घर का कामकाज के साथ साथ बच्चों का देखभाल करती रही..

इसी दरमियान घर हेतु सब्जी भाजी लेने बाजार गई हुई थी तभी बेलापुर जिले के पुलिस की नजर युवती पर पड़ने पर पुलिस पूछताछ में युवती ने बताया कि छत्तीसगढ़ के रहने वाली हूं काम करने आई हुई हूं, तो पुलिस ने मानव तस्करी की आशंका पर थाने ले गई! युवती के बयान के बाद न्यायालय में हाजिर किया और न्यायालय के आदेश पर युवती को मुंबई से लगे पालघर बोईसर जिला ठाणे के रेस्क्यू फाउडेशन फूलपाड़ा के एनजीओ को सुपुर्द दे दिया। संस्था ने अपने आश्रम में 2 वर्षों तक रख युवती के गृह ग्राम का पतासाजी करते रहे, इसी दरमियान एनजीओ संस्था के अथक प्रयास के बाद छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर के आई.सी.पी.एस. नामक एनजीओ संस्था का पता चलने पर संपर्क किया और युवती के गृह ग्राम का पता कर युवती के संबंध में विस्तृत जानकारी एकत्र करने के बाद मुंबई से संस्था को अवगत कराया गया। पश्चात युवती को रेस्क्यू फाउडेशन संस्था के हाउस मदर के पद पर पदस्थ निशा महेश गौड़ा के माध्यम से 10 सितंबर को ट्रेन से निकल गृहग्राम 12 सितंबर को पहुंच जहां युवती धनमति यादव को सुरक्षित सरपंच के उपस्थिति में युवती के माता-पिता को सौप दिया।

बोलचाल में भिन्नता ने 2 वर्षों तक उलझाया

3 वर्ष से गायब युवती धनमति यादव को घर छोड़ने आई संस्था के निशा महेश गौड़ा ने बताया कि मुंबई वह छत्तीसगढ़ के भाषा व बोली में फर्क होने के कारण 2 वर्ष तक युवती को संस्था में ही रखना पड़ा इस दरमियान युवती की पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ संस्था के बागवानी का कार्य करती रही जिसका परिश्रमिक करीब 9 हजार रूपये युवती को भुगतान किया गया औरत अतः युवती का वास्तविक अता-पता हासिल कर युवती को परिजनों के हवाले किया गया।

3 वर्ष से घर से बाहर रही युवती ने बताया कि बाहर परेशानी तो था पर अच्छा पगार के लालच में चली गई थी। किंतु काम के दौरान सब्जी लेने बाजार गई थी तभी वहां की पुलिस ने पकड़ सीधे थाने ले गई और काम करने वाले घर ले जाकर समान सहित वापस बुलाया और कोर्ट के आदेश पर संस्था को सौंप दिया और संस्था के प्रयास से घर वापस आ गई। घनमति यादव ने आगे बताया कि प्रारंभ में जिस घर में 2 वर्ष तक कार्य की वहां प्रतिमाह प्रारंभिक 7 हजार  मिलता था जिसमें से 80 हजार रुपए बचा कर रखी थी जिसे समान सहित 80 हजार रुपए नगद भी बेलापुर पुलिस स्टेशन में जमा है जिसे पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर देने की बात कही।

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