1 बार फिर इंसानियत हुई शर्मसार..7 किमी खाट में रख ले जाना पडा शव

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कांकेर
सूबे में स्वास्थ विभाग के तहत मिलने वाली वाहन सुविधाओं का रोना आम हो चुका है इसी तर्ज पर शव वाहन के टोटे में लोग कभी कंधे पर शव रखकर अस्पताल पहुचाते है तो कभी माँ बाप पैसे के आभाव में बेटे के शव को पैदल लेकर अपने घर पहुचते है ऐसा ही के मामला कांकेर जिले के स्वास्थ्य केंद्र कोयलीबेड़ा में शव वाहन न होने से  मरीज की मृत्यु होने पर 5 से 7 किमी की दुरी कंधे पर ले जाना पड़ा। मामला कोयलीबेड़ा सामुदायिक स्वस्थ्य केंद्र का है जहां मर्दा निवासी जानसिंग पिता सुकालूराम को कल ही तबियत खराब होने पर केंद्र लाया गया था टीबी का पुराना मरीज था परिवार वालों का कहना था खाट पर ही लाया गया था और आज जानसिंग में जान नही रही तो भी खाट में ही गांव 7 किमी दूर ले जाना पड़ रहा है।  शव वाहन क्या होता है गांव वाले नही जानते है बस इतना के उन्हें तो बस घर तक पहुंचना है और क्रियाकर्म करना है।
जिस देश में मृत इंसान के शव को घर तक पहुचाने की भी व्यवस्था नहीं है इन्सानियत का कोई मोल नहीं है सरकारी तंत्र में मर्म नहीं है उस देश को प्रधानमंत्री डिजटल करने का ख्वाब देख रहे है, सम्पूर्ण भारत को खुले में शौच मुक्त करने की तैयारी चल रही है पर शायद इन सबसे ज्यादा जरूरी है मूलभूत सुविधाओं का सही मायने में विस्तार होना शिक्षा व स्वास्थ जैसी सुविधाए सही रूप में देश वासियों को मिलना, लेकिन इस प्रदेश में इस देश में इनके मायने बदल चुके है यहाँ प्रशासनिक अमला अपने मूल काम को भूल कर या तो इण्डिया को डिजिटल बनाने में व्यस्त है या तो शौचालय बनवाने में व्यस्त है इतनी व्यसतता कम थी की उसके बाद अब कैस लेश लेनदेन का टारगेट अधिकारियों के सर पर बैठा हुआ है।
लेकिन छतीसगढ़ के कांकेर में हुई इस घटना का मंजर ये था की पत्नी मनाय बाई का रो रो कर बुरा हाल है की ढांढस बंधाने वाला नही पिता सुकालू पीछे पीछे चल रहा था कारण एक था की बस घर तक पहुंचना है। क्या जिस अस्पताल में मौत हुई वहा के कर्मचारियों ने 1099 या शव वाहन कोई भी साधन नही उपलब्ध कराया। बहरहाल प्रदेश में यह कोई पहली घटना नहीं है कभी अपनी की लाश को माँ बाप पैदल लेकर इस लिए निकल पड़ते है क्योकि उनके पास पैसे नहीं बचे थे और पैसे बचते भी कैसे इस प्रदेश में चिकित्सको द्वारा बिछाए गए मायाजाल की पकड़ से पैसे बच पाते तब तो मृतक के शव को गंतव्य तक ले जाने के लिए पैसे होते।
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