शहादत के बाद भूली सरकार..सात वर्ष बाद भी नहीं मिल रहा सम्मान…

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राजनांदगाव से “हितेश शर्मा”
आज से ठीक ७ साल पहले १२ जुलाई २००९ को ३६ गढ़ के राजनांदगांव जिले के मदनवाड़ा ( कोरकोट्टी )में २९ जवानों ने नक्सलियों से लड़ते हुए अपने प्राणो की आहुति दी थी लेकिन ७ साल बीत जाने के बाद भी जवानों के परिवार अब भी शहीदों के सम्मान की लड़ाई लड़ रहे है शहीद जवानों के गाव में उनकी प्रतिमा स्थापित करने के लिए परिजन कई बार विभाग से लेकर सूबे की मुखिया  रमन सिंह तक गुहार लगा चुके है लेकिन शहीदों की प्रतिमा अब तक स्थापित नहीं हो सकी है, ऐसे में शहीद हुए जवानों के परिजन उनके सम्मान के लिए जद्दोजहद कर रहे है
36गढ़ में नक्सली  समय समय पर सरकार को चुनौती देते आये है कई पुलिस वालो के साथ नेता और आम जनता  को भी अपनी  गोलियों का निशाना बना चुके है १२ जुलाई २००९ को ऐसा ही एक नक्सली हमला हुआ था ३६ गढ़ के ही राजनांदगांव जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र मानपुर के कोरकोट्टी, मदनवाड़ा और सीतागांव में राजनांदगांव जिले के तत्कालीन एसपी विनोद कुमार चौबे सहित 29 जवान नक्सली मुठभेड़ में शहीद हुए थे। उनके शहादत की 7वीं बरसी पर शहर के पुलिस लाइन में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।
लगातार नक्सल समस्या से जूझ रहे राजनांदगांव के लिए ये दिन काला दिन साबित हुआ देश के इतिहास में ये पहली बार था जब किसी नक्सली वारदात में किसी जिले के  sp शहीद हुए हो सात वर्ष बाद भी इस दिन की याद कर लोगों की आंखे नम हो जाती हैं। जिले के पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में शहीदों की तस्वीरों को देखकर उनके परिजन फफक पड़े। शहीदों की 7वीं बरसी के अवसर पर पुलिस लाइन में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में देशभक्ति के गीतों के बीच शहीदों के चित्रों पर पुष्पांजली अर्पित की गई। शहीदों के परिजनों को पुलिस विभाग के द्वारा शाल और श्रीफल देकर उनकी शहादत को नमन किया गया। शहीदों के सम्मान को लेकर हालंकि  दुर्ग रेंज के आईजी दीपांशु काबरा ने कहा कि एक माह के भीतर शहीदों की प्रतिमा उनके गांव में लगवा दी जाएगी। अब देखना होगा की जिस काम को स्वयं सूबे के मुखिया ७ वर्षो में नहीं कर सके उसे दुर्ग रेंज के ig साहब १ महीने में कैसे करेंगे  ?
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